ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 690, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंविध्वंसकारी राक्षस तुम्हारे शरीर में पाप का प्रवेश नहीं करा सकते. (६) न यस्य सातुर्जनितोरवारि न मातरापितरा नू चिदिष्टौ. अधा मित्रो न सुधितः पावकोऽ ग्निद्दीदाय मानुषीषु विक्षु.. (७) हे वर्षाकारक अग्नि! तुम्हारे पशु आदि दान को अन्य लोग नहीं रोक सकते. माता-पिता के समान धरती-आकाश भी तुम्हें प्रेरणा देने में समर्थ नहीं होते. भली प्रकार तृप्त एवं शुद्ध करने वाले अग्नि मानव प्रजाओं में मित्र के समान प्रकाशित होते हैं. (७) द्वियं पञ्च जीजन्त्संवसानाः स्वसारो अग्निं मानुषीषु विक्षु. उषर्बुधमथर्यो३ न दन्तं शुक्रं स्वासं परशुं न तिग्मम्.. (८) स्त्रियों के समान परस्पर मिली हुई मनुष्यों की दस उंगलियां मंथन द्वारा प्रातःकाल जागने वाले, हव्य-भक्षणकर्त्ता, किरणों द्वारा दीप्त, सुंदर मुख वाले एवं तेज परशु के समान राक्षसहननकर्त्ता अग्नि को उत्पन्न करती हैं. (८) तव त्ये अग्ने हरितो घृतस्ना रोहितास ऋज्वञ्चः स्वञ्चः. अरुषासो वृषण ऋजुमुष्का आ देवतातिमह्वन्त दस्माः.. (९) हे अग्नि! नाक के नथुनों से फेन गिराने वाले, लाल रंग वाले, सीधे चलने वाले, दीप्तिशाली, कामवर्षी, साधनयुक्त एवं सुंदर घोड़े ऋत्विजों द्वारा हमारे यज्ञ की ओर बुलाए जाते हैं. (९) ये ह त्ये ते सहमाना अयासस्त्वेषासो अग्ने अर्चयश्चरन्ति. श्येनासो न दुवसनासो अर्थं तुविष्वणसो मारुतं न शर्धः.. (१०) हे अग्नि! तुम्हारी शत्रुओं को पराजित करने वाली, गमनशील, दीप्त व सेवा करने योग्य किरणें घोड़ों के समान अपने गंतव्य स्थान पर जाती हैं एवं मरुतों के समान अधिक आवाज करती हैं. (१०) अकारि ब्रह्म समिधान तुभ्यं शंसात्युक्थं यजते व्यू धाः. होतारमग्निं मनुषो नि षेदुर्नमस्यन्त उशिजः शंसमायोः.. (११) हे प्रज्वलित अग्नि! तुम्हारे लिए हमने स्तोत्र बनाया है. उसी को होतागण बोलते हैं. यजमान तुम्हारे निमित्त यज्ञ करते हैं. इसलिए तुम हमें धन दो. ऋत्विज् मानवों द्वारा प्रशंसनीय व देवों को बुलाने वाले अग्नि की पूजा करने के लिए हम धन की कामना से बैठे हैं. (११) सूक्त-७ देवता—अग्नि ebook converter DEMO Watermarks*