ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 691, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअयमिह प्रथमो धायि धातृभिर्होता यजिष्ठो अध्वरेष्वीड्यः. यमप्रवानो भृगवी विरुरुचुर्वनेषु चित्रं विभ्वं विशेविशे.. (१) आप्रवान् एवं अन्य भृगुवंशी ऋषियों ने वनों में दावाग्निरूप से दर्शनीय एवं समस्त प्रजाओं के स्वामी अग्नि को प्रज्वलित किया था. वे ही देवों को बुलाने वाले, अतिशय यज्ञकर्त्ता, यज्ञों में ऋत्विजों द्वारा स्तुत्य एवं देवों में सर्वश्रेष्ठ अग्नि यज्ञकर्त्ताओं द्वारा स्थापित किए गए हैं. (१) अग्ने कदा त आनुषग्भुवद्देवस्य चेतनम्. अधा हि त्वा जगृभिरे मर्तासो विश्वीड्यम्.. (२) हे द्योतमान एवं मानवों द्वारा पूज्य अग्नि! तुम्हारा तेज कब गतिशील होगा? मनुष्य तुम्हें ग्रहण करते हैं. (२) ऋतावानं विचेतसं पश्यन्तो द्यामिव स्तृभिः. विश्वेषामध्वराणां हस्कर्तारं दमेदमे.. (३) मायारहित, विशिष्ट-ज्ञान वाले, तारों से भरे हुए आकाश के समान चिनगारियों से युक्त एवं समस्त यज्ञों की वृद्धि करने वाले अग्नि को देखते हुए ऋत्विजों ने उन्हें प्रत्येक यज्ञशाला में ग्रहण किया. (३) आशुं दूतं विवस्वतो विश्वा यश्चर्षणीरभि. आ जभ्रुः केतुमायवो भृगवाणं विशेविशे.. (४) मनुष्य समस्त प्रजाओं को पराजित करने वाले, तीव्रगति, यजमान के दूत, झंडे के समान ज्ञान कराने वाले एवं दीप्तिमान् अग्नि को सभी प्रजाओं के कल्याण के लिए लाते हैं. (४) तमीं होतारमानुषक्चिकित्वां सं नि षेदिरे. रण्वं पावकशोचिषं यजिष्ठं सप्त धामभिः.. (५) ऋत्विज् आदि मानवों ने प्रसिद्ध, क्रमशः देवों को बुलाने वाले, ज्ञानसंपन्न, रमणीय, पवित्र प्रकाश वाले, श्रेष्ठ यज्ञकर्त्ता एवं सात तेजों से युक्त अग्नि को स्थापित किया था. (५) तं शश्वतीषु मातृषु वन आ वीतमश्रितम्. चित्रं सन्तं गुहा हितं सुवेदं कूचिदर्थिनम्.. (६) माता के समान जलसमूह में एवं वृक्षों में वर्तमान, सुंदर, जलने के डर से प्राणियों द्वारा असेवित, विचित्र, गुहा में छिपे हुए, शोभन धनयुक्त एवं सभी जगह हव्य की अभिलाषा करने वाले अग्नि को ऋत्विजों ने स्थापित किया था. (६) ebook converter DEMO Watermarks*