ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 762, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयज्ञशाला को ज्ञान का विषय बनाती हुईं जल उत्पन्न करने वाली किरणों के सामन प्रशंसापात्र बनती हैं. (८) ता इन्न्वे३व समना समानीरमीतवर्णा उषसश्चरन्ति. गूहन्तीरभ्वमसितं रुशद्भिः शुक्लास्तनूभिः शुचयो रुचानाः.. (९) वे एक रूप वाली, समान व अनगिनत रंगों से युक्त उषाएं अपने दीप्तिशाली शरीर द्वारा प्रकाश फैलाती हुई एवं अपनी किरणों से महान् अंधकार का नाश करती हुई विचरण करती हैं. (९) रयिं दिवो दुहितरो विभातीः प्रजावन्तं यच्छतास्मासु देवीः. स्योनादा वः प्रतिबुध्यमानाः सुवीर्यस्य पतयः स्याम.. (१०) हे तेजस्वी सूर्य की पुत्रियो एवं दीप्तिशाली उषाओ! तुम हमें पुत्र-पौत्रादि से युक्त धन दो. हम सुख प्राप्ति के कारण तुम्हें जगा रहे हैं. इस प्रकार हम पुत्र-पौत्र युक्त धन के स्वामी होंगे. (१०) तद्वो दिवो दुहितरो विभातीरुप ब्रुव उषसो यज्ञकेतुः. वयं स्याम यशसो जनेषु तद्द्यौश्च धत्तां पृथिवी च देवी.. (११) हे तेजस्वी सूर्य की पुत्री रूपी उषाओ! हम यज्ञ के ज्ञापक रूप में तुमसे प्रार्थना कर रहे हैं कि हम सब लोगों के मध्य में यश और अन्न के स्वामी बनें. स्वर्ग एवं दीप्तिपूर्ण धरती हमारा वह यश धारण करे. (११) सूक्त—५२ देवता—उषा प्रति ष्या सूनरी जनी व्युच्छन्ती परि स्वसुः. दिवो अदर्शि दुहिता.. (१) भली प्रकार स्तुत, प्राणियों की कुशल नेत्री एवं उत्तम फलों को जन्म देने वाली सूर्यपुत्री उषा दिखाई देती है एवं रात बीतने पर अंधेरे का नाश करती है. (१) अश्वेव चित्रारुषी माता गवामृतावरी. सखाभूदश्विनोरुषाः.. (२) घोड़े के समान सुंदर, दीप्तिशालिनी, किरणों की माता एवं यज्ञ की स्वामिनी उषा अश्विनीकुमारों के साथ स्तुत हो. (२) उत सखास्यश्विनोरुत माता गवामसि. उतोषो वस्व ईशिषे.. (३) हे उषा! तुम अश्विनीकुमारों की सखा, किरणों की माता एवं धन की स्वामिनी हो. (३) ebook converter DEMO Watermarks*