भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 850, कुल 1855 में से

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स्यन्ना अश्वा इवाध्वनो विमोचने वि यद्वर्तन्त एन्यः.. (७) भेदन किए गए बादल से निकली हुई जल-धाराएं वेग के साथ आकाश में इस प्रकार गमन करती हैं, जिस प्रकार दुधारू गाय दूध देती है. शीघ्रगामी अश्व जिस प्रकार मार्गों पर चलते हैं, उसी प्रकार नदियां तेजी से बहती हैं. (७) आ यात मरुतो दिव आन्तरिक्षादमादुत. माव स्थात परावतः.. (८) हे मरुतो! तुम अंतरिक्ष, स्वर्ग अथवा इहलोक से यहां आओ. तुम दूरवर्ती स्थान में मत रहो. (८) मा वो रसानितभा कुभा क्रुमुर्मा वः सिन्धुर्नि रीरमत्. मा वः परि ष्ठात्सरयुः पुरीषिण्यस्मे इत्सुम्नमस्तु वः.. (९) हे मरुतो! रसा, अनितभा एवं कुभा नाम की नदियां एवं सभी जगह जाने वाली सिंधु तुम्हें न रोके. जलपूर्ण सरयू नदी तुम्हें न रोके. तुम्हारे आने का सुख हमें प्राप्त हो. (९) तं वः शर्धं रथानां त्वेषं गणं मारुतं नव्यसीनाम्. अनु प्र यन्ति वृष्टयः.. (१०) हे मरुतो! तुम्हारे नवीन रथों के वेग एवं दीप्ति की हम प्रशंसा करते हैं. वर्षा मरुतों के पीछे-पीछे चलती है. (१०) शर्धंशर्धं व एषां व्रातंव्रातं गणङ्गणं सुशस्तिभिः. अनु क्रामेम धीतिभिः.. (११) हे मरुतो! हम सुंदर स्तुतियों एवं हव्य देने आदि कर्मों द्वारा तुम्हारे बलों, समूहों एवं गणों के पीछे चलते हैं. (११) कस्मा अद्य सुजाताय रातहव्याय प्र ययुः. एना यामेन मरुतः.. (१२) मरुद्गण आज किस उत्तम हवि देने वाले यजमान के पास अपने रथ द्वारा जाएंगे? (१२) येन तोकाय तनयाय धान्यं१ बीजं वहध्वे अक्षितम्. अस्मभ्यं तद्धत्तन यद्व ईमहे राधो विश्वायु सौभाग्यम्.. (१३) हे मरुतो! तुम जिस कृपालु मन से हमारे पुत्र-पौत्रों के लिए नष्ट न होने वाले अन्नों के बीज देते हो, उसी मन से हमें भी अन्नों के बीज दो. हम तुमसे पूर्ण आयु एवं सौभाग्ययुक्त धन ebook converter DEMO Watermarks*

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