रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
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संतों ने दिया 11वें द्वार का भेद
दशम द्वार से जीव जब जाई। स्वर्ग लोक में वासा पाई॥ 11वें द्वार से जीव जब जाता। परम पुरुष के लोक समाता॥
दसवें द्वार से न्यारा द्वारा। ताका भेद कहूँ मैं सारा॥
नौ द्वारे संसार सब, दसवें योगी साध। एकादश खिड़की बनी, जानत संत सुजान॥
—कबीर साहिब
.... आठ अटाकी अटारी मज्जारा, देखा पुरुष न्यारा। न निराकार आकार न ज्योति, नहीं तहाँ वेद विचारा। ओंकार कर्त्ता नहीं कोई, नहीं तहाँ काल पसार। वह साहिब सब संत पुकारा, और पाखण्ड है सारा। सदगुरु चीन्ह दीन्ह यह मारग, नानक नज़र निहारा॥
—गुरु नानक देव जी
पलटू कहै साँच कै मानो। और बात झूठ कै जानो॥ जहवाँ धरती नाहिँ अकासा। चाँद सूरज नाहिँ परगासा॥ जहवाँ ब्रह्मा विष्णु न जाहीं। दस अवतार न तहाँ समाहीं॥ आदि जोति ना बसै निरंजन। जहवाँ शून्य शब्द नाहिँ गंजन॥ निरंकार ना उहाँ अकारा। अक्षर शब्द नाहिँ विस्तारा॥ जहवाँ जोगी जाए न पावै। महादेव ना तारी लावै॥ जहवाँ हद अनहद नाहिँ जावै। बेहद वहाँ रहनी ना पावै॥ जहवाँ नाहिँ अगिनि परगासा। पाँच तत्व ना चलता स्वाँसा॥
—पलटू साहिब