भारतकोश
रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

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साहिब बन्दगी

नहीं होगा। फिर इसकी शुद्धता का क्या कहना! एक और बड़ी बात यह कि इसमें हम कोई केमिकलस भी नहीं डाल रहे हैं और न ही कोई मिलावट कर रहे हैं। आप हमारे बच्चे ही तो हैं। जैसे माता-पिता को बच्चों की फिकर होती है, ऐसे ही हमें भी आपकी फिकर है। इसलिए आपके लिए यह परम औषधी बनायी है। इसके सेवन में तीन बातें ध्यान में रखना—

  1. 1. भोजन के बाद एक चम्मच दिन में दो बार ले सकते हैं।
  2. 2. बच्चों और बूढ़ों को आधा चम्मच ही खिलाएँ।
  3. 3. च्यवनप्राश खाने के आधे घण्टे बाद तक पानी मत पिएँ।

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर। न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर ॥

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