भारतकोश
रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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रोगों के उपचार में आयुर्वेद के फार्मूले

कुछ रोग होने पर

  • ▣ 22 ग्राम बाबची, 22 ग्राम हल्दी (दोनों), 12 ग्राम धमासा, 12 ग्राम शिंगरफ, 12 ग्राम हीरा कसीस, 12 ग्राम हरताल, 12 ग्राम मैनसिल, 12 ग्राम पारा-गंधक-सबको गाय के घी के साथ घोटे। जब लेप तैयार हो जाए तो इसे शरीर पर लगाकर 5 घण्टे धूप में बैठें। उसके बाद पानी में नीम का रस डालकर स्नान करें।
  • ▣ आक का दूध दें।
  • ▣ काले दाने (बेल) को अकरकरा के साथ पीसकर कोढ़ वाले स्थान पर लेप करें।
  • ▣ कनेर के फूल को तोड़कर ले आएँ और मीठे तेल में डाल दें। ऐसे 41 दिन तक पड़ा रहने देंगे तो वो गल जायेगा। अब जैतून का तेल भी मीठे तेल जितना ही उसमें डाल कर अच्छी तरह मिला लें। इस तेल की मालिश से सफेद दाग खत्म होते हैं।
  • ▣ त्रिफला, पीपल, अतीस, इलायची, बायबिडंग, चित्रक, जीरा, अजमोद, देवदारू, सोठ, नागरमोथा, कूट चव्च, बच, खुरासानी, संधा नमक, कलौंजी, मिर्च-सबको समान मात्रा में अच्छी तरह से कूट-पीस लें। अब इसे गाय के घी में मिलाकर 4-4 ग्राम की छोटी-2 गोलियाँ बना लें। यह गोली रोगी को हररोज खिलानी चाहिए।

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