रोगों की पहचान

रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
DevanagariHindipublished128 पृष्ठ
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रोगों की पहचान
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यदि कफ के कारण जुकाम होगा तो सिर तो भारी होगा ही, साथ ही नाक से सफेद कफ भी निकलेगा। यदि पित्त के कारण जुकाम होगा तो प्यास तो अधिक लगेगी ही, साथ में नाक से पीला पदार्थ भी निकलेगा और यदि वायु के कारण जुकाम हुआ तो गला तो बँठेगा ही, साथ ही नाक से पतला-पतला मवाद भी निकलेगा।
साधारणतया नाक का बहना, उसका एक या दोनों तरफ से बंद हो जाना, सिर में भारीपन महसूस होना और अधिक छँके आना आदि बताते हैं कि रोगी को जुकाम हो गया है।
- ❑ अदरक का रस निकालकर गर्म कर लें। अब उसे शहद में मिलाकर रोगी को चाटने को दें।
- ❑ चाय में तुलसी के पत्ते डालकर रोगी को पिलाएँ।
- ❑ तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाएँ। मिठास के लिए थोड़ी मिश्री डाल सकते हैं।
- ❑ अजवायन का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर रोगी को दें।
- ❑ कफ के जुकाम में भुने हुए चने खाना भी लाभदायक होता है।
सावधानी बरतें
- ❑ यदि कब्ज है तो पेट की सफाई के लिए व्रत रखें।
- ❑ ठंडे जल से मत नहाएँ।
- ❑ सोते समय सिर के नीचे तकिया मत रखें। यदि रखना ही है तो पतला-सा रखें, जिससे सिर ज्यादा ऊँचा न होने पाए।
- ❑ दही और घी मत खाएँ।
- ❑ भोजन हल्का करें, जो जल्दी पच सके।
आँखों से दिखना कम हो जाने पर
- ❑ 5 ग्राम भीमसेनी कपूर लें, 5 ग्राम केसर और 260 ग्राम गुलाब जल को लेकर अच्छी तरह घोंट ले। अब अच्छी तरह छानकर