रोगों की पहचान

रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
DevanagariHindipublished128 पृष्ठ
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रोगों की पहचान
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कान में दर्द होने पर
- ▣ शहद में अदरक का रस, तेल और थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर रोगी के कानों में डालें।
- ▣ गोमूत्र को गर्म करके रोगी के कानों में डालें।
बहरापन होने पर
- ▣ शहद में अदरक का रस, तेल और थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर रोगी के कानों में डालें। यह दवा बहरेपन में भी लाभदायक है।
गला बैठने पर
- ▣ अड़सू की जड़, पीपल, छोटी हरड, ब्राह्मी और बच-सबको पीसकर चूर्ण बना लें। 3 ग्राम यह चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर चाटें।
- ▣ यदि बोलने से आवाज बैठी हो तो आधा ग्राम सुहागा मुँह में रखकर चूसें।
- ▣ यदि खान-पान की गड़बड़ी से गला बैठा हो तो 1 ग्राम मुलहठी के चूर्ण को मुँह में रखकर चूसें।
दांतों में दर्द होने पर
- ▣ ज्वार के दानों को जला लें। अब उनमें थोड़ा सेंधा नमक डालकर अच्छी तरह पीस लें। यह दवा दांतों पर वहाँ मलें, जहाँ दर्द हो रहा हो।
- ▣ नौशादर, गेरू मिट्टी और काली मिर्च-सबको बराबर मात्रा में लेकर बहुत ही बारीक पीस लें। अब इस चूर्ण से मंजन करें और बाद में इसी को पानी में डालकर कुले भी करें।
- ▣ अड़ुसे के पत्तों को उबालकर उस पानी से कुले करें।
- ▣ विजयसार के पत्तों को सुखाकर अच्छी तरह पीस लें। अब