रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
पृष्ठ 64, कुल 128 में से
संदर्भ में पढ़ें64
साहिब बन्दगी
सरसों के तेल में मिलाकर दाँतों पर लगाएँ।
अनन्नास के रस को रूई के साथ दाँतों में लगाएँ।
अकरकरा को पीसकर छान लें। इसे दाँतों में जहाँ दर्द हो, वहाँ लगाएँ।
हल्दी को तवे पर भून कर दाँतों के नीचे दबाएँ।
दाँतों में बदबू आने पर
नीम की दातून करें। हफ्ते-भर में लाभ मिलेगा।
दाँतों में कीड़े होने पर
मूसाकर्णी के रस को शहद में मिलाकर कुछे करें।
मसूड़ों में सूजन होने पर
चमेली के पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस पानी से फिर कुछे करें।
लीवर में वृद्धि होने पर
प्रवाल पिष्टी, गुरुचि और मंडूक भस्म सबको शहद में मिलाकर सेवन करें।
जामुन के ताजे पत्तों का रस निकालकर सेवन करें।
दिन में दो बार पुनर्नवा मण्डूर की गोली जल के साथ लें।
पित्ती की बीमारी होने पर
गेहूँ का सिरका तथा अजवायन-दोनों को पीसकर रोगी के शरीर पर लेप करें।
गाय का घी लेकर उसमें गेरू और जरा-सा सेंधा नमक डालकर रोगी के शरीर पर लेप करें। फिर उसे गर्म कपड़ों में मोटी चादर या कंबल देकर सुला दें।