भारतकोश
रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 90, कुल 128 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 90

50

साहिब बन्दगी

बाल सफेद होने पर

▯ आँवले के चूर्ण को पानी में घोल लें। फिर इसमें नींबू का रस मिला लें। इस पानी से रोज बाल धोएँ।

बाल गिरने पर

▯ सूखे आँवले को रात में पानी में भिगो दें। सुबह उस पानी से बाल धोएँ।

दस्त होने पर

▯ 20 ग्राम पानी में आँवले को भिगो दें। जब वो नरम पड़ जाए तो थोड़ा-सा नमक मिलाकर पीसें। फिर सफेद चने जितनी गोलियाँ बना लें। दिन में दो बार 2-2 गोलियाँ पानी के साथ खाएँ।

बच्चों के तुतलाने पर

▯ आँवला चबाने को दें।

बार बार पेशाब आने पर

▯ आँवले के रस को पानी में मिलाकर सेवन करें।

पथरी होने पर

▯ सूखे हुए आँवले के चूर्ण को मूली के साथ खाएँ।

प्याज़ से रोगों का निदान

विषधारियों के काटने पर

▯ प्याज़ को पीसकर उसका लेप करें।

नकसीर आने पर

▯ प्याज़ का रस नाक में डालें।

खूनी बवासीर होने पर

▯ 90 ग्राम प्याज़ के रस में 45 ग्राम शक्कर मिलाकर पी लें।

रोगों की पहचान · पृष्ठ 90, कुल 128 में से · BharatKosha