भारतकोश
रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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रोगों की पहचान

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पीलिया होने पर

  • ▣ प्याज को काट नींबू रस में भिगो लें। फिर ऊपर से नमक, काली मिर्च डालकर दिन में दो बार सेवन करें।

टी. बी. होने पर

  • ▣ कच्चे प्याज का सेवन नित्य करें। भोजन के साथ सलाद रूप में प्याज खाना न भूलें।

सिर में गंज होने पर

  • ▣ प्याज का रस रोज गंज वाली जगह रगड़ें।

मिरगी का दौरा आने पर

  • ▣ जैसे ही मिरगी का दौरा आए, एक प्याज को हाथ से तोड़कर आधे टुकड़े को रोगी की नाक के आगे रखें।
  • ▣ मिरगी के रोगी को रोज सुबह खाली पेट प्याज का थोड़ा रस पिलाएँ।

पथरी होने पर

  • ▣ 40 ग्राम प्याज का रस सुबह खाली पेट पिएँ।

कुत्ते के काटने पर

  • ▣ प्याज को पीसकर शहद में मिला लें। यह लेप काटे वाली जगह लगाएँ।

मासिक में रुकावट होने पर

  • ▣ प्याज का सूप निकालकर थोड़ा-सा गुड़ मिला लें। इसे गर्म-गर्म ही पी लें।

सहजन के द्वारा रोगों का निदान

पथरी होने पर

  • ▣ सहजन की सब्जी खाएँ। अत्यंत लाभकारी है।
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