भारतकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 55, कुल 68 में से

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हिन्दीटीकासहितम् ५३ अर्कफलस्य तूलं च कार्पासं कमलं तथा ॥ एषां सूत्रैः वर्तिकां च कार्येद्विधिना बुधः ॥ मनुष्यकपाले कृत्वा कज्जलं नेत्रमंजयेत् ॥ ४१ ॥ अर्कफलके भीतरकी रुई और कपास और कमलके भीतरका सूत्र इनके सूतकी बाती बना मनुष्यके कपालमें कज्जल कर नेत्रोंमें लगावे ॥ ४१ ॥ मंत्रः । ॐ फट काली काली महाकाली मांसशोणितभोजनसुखे देवी ममेयसिति- मानर्षीतोमानशोति । हरीतक्यां वचं पिष्ट्वा गुटिकां कारयेद्बुधः ॥ त्रिधातोगुटिकां धृत्वा मुखे न पश्यंति केचन ॥ ४२ ॥ यह मंत्र पढ हरडमें वच पीस गुटिका बनाके तीन धातुसे मढावे और संमुखमें रखे तो कोई नहीं देखे ॥ ४२ ॥ पादुकासाधनम् असगंधं तथा तैलमंकोलस्य विशेषतः ॥ श्वेतसर्षपमेकत्र हस्तौ पादौ प्रलेपयेत् ॥ शतयोजनं च गच्छेत् नात्र कार्या विचारणा ॥ ४३ ॥ असगंध अंकोलका तेल और सफेद सरसों एकत्र कर हाथ पाँवोंमें लगावे तो सौ योजन चले इसमें विचार नहीं ॥ ४३ ॥ कंदुरीमूलमादाय तिलतैलेन क्वाथयेत् ॥ जंघे पादे च लेपेन चतुर्योजन गच्छति ॥ ४४ ॥ कंदुरीकी जड ले तिलके तेलमें क्वाथ कर जंघामें तथा तलुवोंमें लगावे तो चार योजन चले ॥ ४४ ॥

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