सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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परन्तु स्मरण रहे पंचाङ्ग में तिथि आदि का मान घटी पल में मध्यम सूर्योदय से दिया रहता है। उससे स्पष्ट और स्थानिक ठीक समय बनाने के लिए देशान्तर संस्कार के अतिरिक्त विशेष संस्कार करना पड़ता है, क्योंकि समय भी कई प्रकार के होते हैं। मध्यम समय Mean Time, स्टैंडर्ड समय Standard Time ( रेलवे आदि का समय ) स्थानिक समय Local Time ( जो धूप घड़ी के अनुसार होता है और प्रत्येक स्थान का पृथक्-पृथक् समय होता है )। स्टैंडर्ड समय ( घड़ी के अनुसार घंटा मिनट ) सारे भारतवर्ष के लिए एक ही समय है जो ग्रीन विच से ५।। घंटा अधिक होता है। यह ८५.३° देशान्तर का समय है। मध्यम समय सूर्य के अनुसार निकाला जाता है।
इस प्रकार स्थानिक समय निकालकर उसके अनुसार देशान्तर संस्कार के अतिरिक्त उस समय में और भी जोड़ना घटाना पड़ता है और संस्कार भी करना पड़ता है। यह विषय कुछ कठिन होने से यहाँ नहीं दिया गणित खण्ड में मिलेगा। यहाँ तो प्रारम्भिक ज्ञान के लिये स्पष्ट रीति दी है।
अध्याय १६
अंग्रेजी पंचाङ्ग Almanac या Ephemeris
पिछली बताई हुई बातें समझ लेने पर पंचाङ्ग देखना अच्छी तरह आ जायगा। परन्तु अंग्रेजी पंचांग देखने के लिए कई नवीन बातों की आवश्यकता पड़ेगी, उनको भी संक्षेप से बता देना आवश्यक है।
इंग्लैंड में ग्रीन विच की वेधशाला के आधार पर अंग्रेजी पंचांग ( ऐफेमेरीज ) Raphel's Astronomical Ephemeris अंग्रेजी में प्रतिवर्ष प्रकाशित होती है जिसमें ग्रहों के सम्बन्ध में अनेक सूचनाएँ और दैनिक ग्रह स्पष्ट दिया रहता है। उसमें हूबल और नेफ्यून की स्थिति भी दी रहती है। ग्रहों के स्थान पर केबल उनके चिह्नों का उपयोग होता है। यहाँ के पंचांग सरीखी कई उपयोगी बातें उस पंचांग में दी रहती हैं। अंग्रेजी पंचांग को 'अलमनक' कहते हैं।
उज्ज्वल की वेधशाला से भी एक ऐफेमेरीज प्रतिवर्ष प्रकाशित होती है। उसमें भारतवर्ष के स्टैंडर्ड टाइम के दैनिक ग्रह स्पष्ट और विविध ग्रह योग दिये रहते हैं। ग्रहों की ठीक स्थिति जानने के लिए अच्छे ज्योतिषी उनका उपयोग करते हैं।
सावन दिन apparent day
जब सूर्य मध्याह्न ( दोपहर ) आता है और घूमकर फिर दूसरे दिन उदय होकर