भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

पृष्ठ 154, कुल 288 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 154

१३६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

परम नीच की अवधि पूर्ण होने पर ग्रह क्रमशः उच्चता की ओर बढ़ने लग जाता है और अन्त में परम उच्च पद को प्राप्त होता है। ऐसे ग्रह की स्थिति को आरोही Ascending कहते हैं।

ग्रह उच्चता की पूर्ण अवधि प्राप्त कर फिर क्रमशः नीचता की ओर जाने लगता है ऐसे ग्रह को अवरोही Descending कहते हैं। क्रमशः घटते-घटते अन्त में ग्रह पुनः नीचता की पूर्ण अवधि को प्राप्त होता है।

परम उच्च से परम नीच का अन्तर सदा ६ राशि (१८०°) रहता है। उच्च का अधिकार स्वगृह की अपेक्षा बड़ा होता है। जैसे मेष यह अग्नि तत्व की राशि है, मंगल भी अग्नि तत्व का ग्रह है, मंगल का स्वगृह भी अग्नि तत्व का है रवि मेष राशि में रहता है तो अग्नि तत्व में आने से अधिक प्रबल हो जाता है, इस कारण मेष राशि रवि की उच्चता की राशि मानी गई है। रवि मेष राशि का होगा तो कहेंगे कि रवि उच्च का है। उच्चता की अन्तिम अवधि (सूर्य की) मेष राशि के १०° तक है। मेष के १०° के भीतर जब रवि होता है तो कहेंगे कि रवि परम उच्च का है। इसके उपरान्त रवि नीचे की ओर जाने लगता है।

मेष से ६ राशि उपरान्त तुला है, इस पर सूर्य आयगा तो कहेंगे कि नीच का सूर्य है। तुला के १०° के भीतर सूर्य आने से कहेंगे सूर्य परम नीच का है। तुला के १०° उपरान्त रवि उच्च की ओर जाने लगता है।

इसी प्रकार प्रत्येक ग्रहों के सम्बन्ध में समझना। प्रत्येक ग्रहों की उच्च-नीच राशियों पुष्क-पुष्क हैं। उच्च और नीच के बीच सदा ६ राशि का अन्तर रहता है।

ग्रह की उच्च नीच राशियाँ

ग्रहसूर्यचंद्रमंगलबुधगुरुशुक्रशनिराहुकेतु
उच्च राशिमेषवृषमकरकन्याकर्कमीनतुलावृषवृश्चिक
परम उच्च अंश१०२८१५२७२०२०२०
रारा

परमोच्च राशि ०-१०° १-३° ९-२८° ५-१५° ३-५° ११-२७° ६-२०° १-२०° ७-२०° अंश

नीच राशितुलावृश्चिककर्कमीनमकरकन्यामेषवृश्चिकवृष
परम नीच अंश१०२८१५२७२०२०२०
रा

परम नीच ६-१०° ७-३° ३-२८° ११-१५° ९-५° ५-२७° ०-२०° ७-२०° १-२०° राशि अंश

हर्षाल—यह ग्रह वायु राशि का है। मिथुन तुला में अच्छा माना जाता है। कुंभ राशि में विशेष कर बलवान होता है।