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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

पृष्ठ 155, कुल 288 में से

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ग्रह की उच्च नीच राशियाँ १३७

नेपच्यून—यह ग्रह जल राशि का है। कर्क वृश्चिक और मीन में वलवान होता है। जल राशि मीन में अत्यन्त वलवान होता है।

राहु केतु—कोई राहु का उच्च धन और केतु का उच्च वृष भी मानते हैं।

उच्च नीच—उच्च नीच राशियाँ ग्रहों के मन्दोच्च से सम्बन्ध रखती हैं जिनका उपयोग सिद्धांत ग्रंथ में दिया है।

इसके अतिरिक्त ग्रहों का उच्च-नीच विचार दूसरे प्रकार से भी होता है। सूर्य चन्द्र आदि ग्रहों का पृथ्वी से अन्तर सदैव समान नहीं रहता। कभी-कभी ग्रह पृथ्वी के समीप आ जाते हैं कभी दूर चले जाते हैं, क्योंकि सब ग्रह अण्डाकार मार्ग से सूर्य के आस-पास परिक्रमा कर रहे हैं।

सूर्य चंद्र का विग्य साधारण प्रकार से देखने में एक समान दिखता है, परन्तु ध्यान से देखोगे तो जहाँ पृथ्वी की दूरी समीप या अधिक हो जाती है तो विग्य के आकार में कुछ अन्तर प्रगट होने लगता है, कभी कुछ बड़ा कभी छोटा प्रगट होता है। पृथ्वी की कक्षा से जो विन्दु समीपवर्ती प्योति से बहुत दूर है उसे उच्च कहते हैं और जो पास है उसे नीच कहते हैं। सूर्य दिसम्बर के अन्त में अपनी कक्षा में नीच में होता है और जून के अन्त में उच्च का होता है। सूर्य चंद्र उच्च होते हैं तो पृथ्वी से सबसे लम्बी दूरी पर होते हैं और उस समय उसका विग्य छोटा दिखता है। जब सूर्य चंद्र पृथ्वी के पास होते हैं तब नीच होता है उस समय विग्य बड़ा दिखता है, ऐसे समय में ग्रहण हुआ तो खप्रास ग्रहण होता है। परन्तु यहाँ ऊपर जो ग्रहों की परम उच्च राशि अंश और परम नीच राशि अंश बताये गए हैं वे स्थिर कर लिए गए हैं और उनमें कभी परिवर्तन नहीं होता। इस कारण ऊपर बताये चक्र के अनुसार ही सदा उच्च नीच ग्रहण करना।

(३) ग्रहों का मूल त्रिकोण

जिस प्रकार ग्रहों का विशेष अधिकार उच्च के सम्बन्ध में पहिले बता चुके हैं उसी प्रकार एक और ग्रह का अधिकार है उसे मूल त्रिकोण कहते हैं। यह अधिकार उच्च से कुछ कम होता है। नीचे चक्र में बताया है कि किस राशि के कितने अंश पर होने से ग्रह मूल त्रिकोण में होता है। कुछ ग्रह की राशियाँ स्वक्षेत्र भी हैं, मूल त्रिकोण भी हैं और उच्च भी हैं, इसका स्पष्टीकरण करने के लिए यह भी चक्र में बतलाया है कि कितने अंश तक मूल त्रिकोण और कितने अंश तक उच्च या स्वक्षेत्र हैं। स्वक्षेत्र अधिकार से मूल त्रिकोण अधिकार बड़ा होता है।

साधारण प्रकार से ग्रहों के मूल त्रिकोण की राशि—

ग्रहसूर्यचंद्रमंगलबुधगुरुशुक्रशनिराहुकेतु
राशिसिंहवृषमेघकन्याधनतुलाकुंभकुंभसिंह
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