सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१३६ : सचिन ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
मूल त्रिकोण चक्र
| ग्रह | सूर्य | चंद्र | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मूल त्रिकोण राशि | सिंह | वृष | मेष | कन्या | धन | तुला | कुंभ |
| उच्च के अंश | X | ३ | X | १५ | X | X | X |
| मूल त्रिकोण के अंश | २० | २७ | १२ | १० | १० | १५ | २० |
| स्वक्षेत्र अंश | १० | X | १८ | ५ | २० | १५ | १० |
मूल त्रिकोण के अंशों में किसी-किसी का मतभेद है, परन्तु राशियों के बारे में कोई मतभेद नहीं है। यहाँ वृहस्पराशरी मत से मूल त्रिकोण के अंश दिए हैं।
चक्र का स्पष्टीकरण
सूर्य सिंह राशि में २०° तक मूल त्रि० होता है, शेष १०° उसके स्वक्षेत्र का है। चंद्र वृष के ३° तक उच्च उपरान्त २७° तक मूल त्रि० होगा। मंगल मेष के १२° तक मूल त्रिकोण, शेष स्वक्षेत्र होगा। बुध कन्या के १५° तक उच्च, उपरान्त १०° तक मूल त्रिकोण, शेष ५° स्वक्षेत्र। गुरु धन के १०° तक मूल त्रिकोण, उपरान्त स्वक्षेत्र होगा। शुक्र तुला के १५° तक मूल त्रिकोण, उपरान्त स्वक्षेत्र होगा। शनि कुंभ के २०° तक मूल त्रिकोण, उपरान्त स्वक्षेत्र होगा।
मूल त्रिकोण के विचार से ही ग्रह की नैसर्गिक मैत्री स्थिर हुई है, यह आगे बताया जायेगा।
अध्याय २७
ग्रहमैत्री Friendship
कुण्डली में ग्रहों की मैत्री का विचार होता है। यदि ग्रह अपने घर या मित्र के घर में होता है तो बलवान होता है। शत्रु के घर में बलहीन हो जाता है। यह सब विचारने के लिए देखना पड़ता है कि ग्रह जिस स्थान ( घर ) में बैठता है वह उसका