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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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ग्रहमैत्री : १३९

मित्र, शत्रु या सम है, इस कारण ग्रहों की मैत्री जानना आवश्यक है। सम का अर्थ है कि वह न तो मित्र है और न शत्रु है, उदासीन ग्रह है।

मैत्री दो प्रकार की है—(१) नैसर्गिक मैत्री (२) तात्कालिक मैत्री। नीचे नैसर्गिक मैत्री चक्र दिया है, उससे जान सकते हैं कि कौन ग्रह का कौन मित्र या शत्रु है।

नैसर्गिक मैत्री चक्र Natural friendship—

ग्रहमित्र friendशत्रु enemyसम neutral
१ रवि केचंद्र, मंगल, गुरुशनि, शुक्र, राहुबुध
२ चंद्र ,,रवि, बुधराहुमंगल, गुरु, शुक्र, शनि
३ मंगल ,,रवि, चंद्र, गुरुबुध, राहुशुक्र, शनि
४ बुध ,,रवि, शुक्र, राहुचंद्रमंगल, गुरु, शनि
५ गुरु ,,रवि, चंद्र, मंगलबुध, शुक्रशनि, राहु
६ शुक्र ,,बुध, शनि, राहुरवि, चंद्रमंगल, गुरु
७ शनि ,,शुक्र, बुध, राहुरवि, चंद्र, मंगलगुरु
८ राहु ,,बुध, शुक्र, शनिरवि, चंद्र, मंगलगुरु

स्पष्टीकरण—

रवि का मित्र चंद्र, मंगल, गुरु है, जब रवि, चंद्र की राशि (कर्क) या मंगल की राशि (मेष, वृश्चिक) या गुरु की राशि (धन, मीन) में से किसी राशि में हो तो कहेंगे रवि मित्रगृही है। सूर्य का शत्रु शनि, शुक्र है, जब रवि इनके घर में अर्थात् मकर, कृत्त (शनि की राशि) या तुला, वृष (शुक्र गृह) में होगा तो कहेंगे सूर्य शत्रु क्षेत्री है या शत्रु गृही है। जब बुध के गृह मिथुन या कन्या राशि में से किसी में सूर्य होगा तो कहेंगे सूर्य समक्षेत्री है। इसी प्रकार दूसरे ग्रहों की भी मैत्री का विचार चक्र के अनुसार होता है। इस मैत्री में कोई परिवर्तन नहीं होता। इस कारण इसे नैसर्गिक मैत्री कहते हैं। यह मैत्री स्वाभाविक है।

नैसर्गिक मैत्री में विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि कई ग्रहों की परस्पर मैत्री तो ठीक है (जैसे रवि का मित्र गुरु है तो गुरु का भी मित्र रवि है), परन्तु सब ग्रहों का ऐसा सम्बन्ध नहीं है। कोई ग्रह किसी से मैत्री तो मानता है, परन्तु दूसरा ग्रह उससे शत्रुता रखता है। जैसे चंद्र, बुध से मैत्री रखता है, परन्तु बुध, चंद्र से शत्रुता रखता है। इसी प्रकार परस्पर मैत्री में कहीं-कहीं विरोध पड़ता है, वह नीचे के चक्र में समझाया है जिसका ध्यान रखना चाहिए।