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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

पृष्ठ 153, कुल 288 में से

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ग्रह विचार : १३५

विचार होता है। इस कारण सूर्य के युवराज वृध को यह स्थान ( कन्या राशि ) मिला। सूर्य से तीसरा तुला है, तीसरे से कण्ठ स्वर और वस्त्रादि का विचार होता है। यह सांसारिक सुखों का स्थान होने से दैत्यगुरु शुक्र को यह स्थान मिला, क्योंकि शुक्र सांसारिक सुखों के स्वामी माने गये हैं। सूर्य से चतुर्थ स्थान में वृश्चिक है। चतुर्थ से वाहन शू सम्पत्ति आदि का विचार होता है, वह स्थान सेनापति मंगल को मिला। मंगल शूभिपुत्र है, जमीन वाहन आदि का स्वामी है। सूर्य से पंचम धन है जिससे ईश्वर प्रेम विद्या आदि का विचार होता है, इससे गुरु को जो विद्या ईश्वर प्रेम आदि का दाता है, यह स्थान मिला। अन्त में सूर्य से षष्ठ स्थान में मकर है। षष्ठ स्थान रोग दुःख आदि का प्रगट करता है, इसीसे रोग दुःख आदि के स्वामी शनि को यह स्थान मिला।

इस प्रकार सूर्य राजा है जिसके समीप रानी चन्द्र है। सूर्य की रानी चन्द्र को इसलिये कहा है कि चन्द्र स्त्री ग्रह है और पृथ्वी के समीप होने से इसका सबसे बड़ा प्रभाव पड़ता है। सूर्य आत्मा है, चन्द्र मन है इस कारण सम्बन्ध होने से चन्द्र को रानी कहा है। इनके समीप युवराज वृध है। युवराज के वाजु से मंत्री शुक्र, फिर इसके बाद सेनापति मंगल को स्थान मिला है। इसके बाद मंत्री गुरु है और अन्त में शनि दास को स्थान मिला है। यही चित्र संख्या ७२ में बताया है।

अध्याय २६

ग्रह की उच्च नीच राशियाँ Exaltation and Debilitation or fall

जिस प्रकार प्रत्येक ग्रह का स्वस्थान होता है उसी प्रकार प्रत्येक ग्रहों का एक और विशेष महत्व का स्थान माना हुआ है। यह अधिकार ग्रह की उच्चता सूचित करता है। कोई भारी अधिकार प्राप्त मनुष्य अपने अधिकार का पूर्ण उपयोग कर किसी को विशेष लाभ पहुँचा सकता है, परन्तु वह अधिकार चले जाने पर किसी को भी कोई लाभ नहीं पहुँचा सकता।

इसी प्रकार ग्रह के अधिकार सम्बन्ध का विचार अर्थात् उच्चता का विचार इससे होता है। इस उच्चता की पूर्ण अवधि को अर्थात् पूर्ण अधिकार होने को—deep exaltation कहते हैं। अधिकार हीन हो जाने पर—नीच कहलाता है। उस नीचता की पूर्ण अवधि को परम नीच deep debilitation or deep fall कहते हैं। परम नीच ग्रह होने पर लाभ तो कुछ नहीं कर सकता, परन्तु नीचतापूर्ण कार्य करने की ओर उसका झुकाव हो जाता है।

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