सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 183, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाव परिचय : १६५
न मूल्य भाव—भरण, रंध्र, आयु, अंतक, गुण, सूत्रकृच्छ्र, गुहा, क्षीर, छिद्र, ग्राम्य, निघन, लय; स्थान ।
९ धर्म भाव—पैतृक, भाग्य, गुरु, तप; लाभ, शुभ, दया, मार्ग, अर्जित ।
१० कर्म भाव—आज्ञा, मान, खं, आस्पद, दशम, व्योम, ताल, मेघूरण ।
११ आय भाव—लाभ, प्राप्ति, आगम, भव, सर्वतो भद्र ।
१२ व्यय भाव—रिफ्त, अंत्य, विनाश, लन का अन्त्य खण्ड, प्रांत्य, अंतिम, रिःफ । भाव संज्ञा—
उपर्युक्त भावों के नाम क्रमशः बताये हैं परन्तु विशेष परिस्थिति के अनुसार इनके विशेष नाम भी हैं जिनको जानना आवश्यक है । नीचे बताया है कि किस-किस भाव की क्या विशेष संज्ञा है । यहाँ भाव के नाम न लिखकर उनके क्रम सूचक अंक दिए हैं ।
भाव
लनकुण्डली
- (१) केन्द्र, कंटक या चतुष्टय १,४,७,१०
- (२) पणफर २,५,८,११
- (३) आपोदिलम ३,६,९,१२,
- (४) उपचय ३,६,१०,११,
- (५) अपचय ( जो उपचय नहीं ) १,२,४ ५,७,८,९,१२
- (६) चतुरस्र ४,८ ।
- (७) त्रिक ६,८,१२
- (८) त्रिकोण ५,९
- (९) त्रिविकोण ९
इन सबको उदाहरण देकर समझाते हैं ।
१ केन्द्र (१) लन में वृश्चिक (४) चतुर्थ भाव में कुंभ राशि का सं० (७) सप्तम भाव में वृष का वृ० श० (१०) दशम में सिंह राशि है, ये सब राशियां और ग्रह (८,११,२,५, राशियां और सं० वृ० श० ग्रह) केन्द्र में हैं ।
२ पणफर—(२) में धन राशि, (५) में मीन, (८) में मिथुन, (११) भाव में
कन्या राशि है । इन स्थानों की राशियां पणफर में हैं । अष्टम में चन्द्र गुरु शुक्र हैं । ये ग्रह भी पणफर में हैं ।
लनकुण्डली