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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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१६६ . सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

३ आपोक्लिम--(३) में मकर का केतु, (६) में मेष का सुर्य, (९) में ककं का राहु और (१२) में तुला राशि ये सब आपोक्लिम में हैं।

केन्द्र अर्थात्‌ वीच के स्थान से दुसरा पणफर और तीसरा आपोक्लिम का घर होता है, जैसा यहाँ समझा चुके हैं ।

४ उपचय, ५ अपचय--यहां कुंडली

में जहां उ० लिखा है वह उपचय स्थान है

शेष जहां + है वे अपचय स्थान हैं। यहां लग्न कुण्डली में उपचय में (३) में मकर

का केतु, (६) में मेष का सूयं, (१०) में

सिह और (११) में कन्या राशि है । शेष

बचे हुए स्थान अपचय कहलाये ।

६ चतुरस्न-- किसी भी स्थान से चौथा और आठवां चतुरस्र कहलाता है, जैसे मंगल से शनि और बुध चतुर्थ में और कन्या राशि (११ भाव) अष्टम में हैं ये मंगल से चतुरल् में हुए । इसी प्रकार किसी भी स्थान से चौथा आठवां स्थान गिनने से जो आवे वह चतुरस्र कहलाता है ।

७ त्रिक--किसी भी स्थान से ६-८ और १२ वें स्थान त्रिक स्थान कहलाते हैं, जैसे मंगर से छठा ककं का राहु नवम भाव में है। मंगल से आठवां लाभ भाव में कन्या राशि है । मंगल से बारहवें मकर का केतु तृतीय भाव में है । ये सब मंगल के त्रिक स्थान में हुए ।

८ विकोण--किसी भी स्थान से नवम स्थान और वहां से पंचम स्थान त्रिकोण कहलाता है । एक दूसरे से नवम पंचम राशियाँ इस प्रकार होंगी । १, ५, ९। ३, ७, ११ । ४, ८, १२ । ये राशियां एक दूसरे से त्रिकोण में हैं । जैसे मंगछ से पंचम में चन्द्र गुरु शुक्र है और चंद्र से नवम स्थान में कुंभ का मंगळ - है तो १ वह स्थान जहाँ ग्रह हैं वहां से १ गिना, वहां से(५) पांचवें स्थान में मिथुन का चन्द्र है और वहाँ से (९) नवम स्थान में मंगल है, इस प्रकार ये स्थान एक दूसरे से त्रिकोण में हुए, क्योंकि यहाँ इनसे त्रिकोण बनता है । इसी प्रकार किसी भी स्थान से 1०१०९ स्थान गिनो तो वे दोनों स्थान त्रिकोण में पड़ते हैं । १ स्थान तो केवल उस स्थान को गिनने के लिये था, यहां बचे हुए २ ही स्थान त्रिकोण के होते हैं जैसा कुंभ का मंगल और मिथुन को चन्द्र एक दुसरे से त्रिकोण में हूँ । ९ त्रित्रिकोण--किती स्थान से नवम स्थान नित्रिकोण कहलाता है, जैसे चन्द्र से मंगल नवम स्थान में है तो कहेंगे कि चन्द्र से त्रित्रिकोण में मंगल है ।