सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकेवल कुण्डली पर से जन्म समय मास-पक्ष आदि का ज्ञान : २२१
सूर्य चन्द्र की राशि अंश पर से पहले बताये होइ। चक्र में दिए हुए अंशों पर से इनका नक्षत्र जान सकते हो जैसा सूर्य ११-२०-५° है अर्थात् मीन के ५° पर है। होइ। चक्र में ११-२२-३°-२०° तक पूर्वा भाद्रपद का चौथा चरण दिया है। इष्ट सूर्य ११-२०-५° है इससे ज्ञात गया कि सूर्य पूर्वा भाद्रपद का चौथा चरण पार करके उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में गया है। उत्तरा भाद्रपद का पहिला चरण ११-२०-६-४० तक होता है, इस कारण सूर्य जन्म समय उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र पर था।
पुष्य नक्षत्र से उत्तरा भाद्रपद ( सूर्य नक्षत्र ) तक गिना १९ हुए। जन्म नक्षत्र ( चन्द्र नक्षत्र ) शतभिषक है ( ऊपर निकाल चुके हैं )। श्रवण से चन्द्र नक्षत्र शतभिषक तक गिना ३ हुए। १९+३=२२ वां योग=साध्य योग आया। यदि योग २७ से अधिक आवे तो २७ का भाग देने पर जो शेष रहता उसे लेते। यहाँ जन्म का योग साध्य निकला।
(९०) कुण्डली से जन्म का कारण जानना
कुण्डली में जो जन्म की तिथि मिले उस तिथि तक शुक्ल प्रतिपदा से गिनो और उस संख्या में २ का गुणा कर १ घटाकर ७ का भाग दो जो शेष बचे वही कारण पराद्ध में जानना।
स्थिर करण। शुक्ल प्रतिपदा के पूर्वार्द्ध में किस्तुन्न और पराद्ध में बव, कृष्ण १४ को, पराद्ध में शकुनि। अमावस्या के पूर्वार्द्ध में शकुनि। अमावस्या के पूर्वार्द्ध में चतुष्पद और पराद्ध में नाग सदा रहते हैं। यदि इनमें से कोई तिथि का जन्म हो तो इसी के अनुसार करण जानना। शेष का उपरोक्त रीति से जानना।
जैसे कृष्ण १३ का जन्म है। शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा तक १५ दिन कृष्ण पक्ष के १३ दिन। १५+१३=२८ X २=५६-१=५५-७=शेष ६। छठा करण बणिज हुआ। यह त्रयोदशी के पराद्ध में हुआ। इसके पूर्वार्द्ध में इसके पहिले का अर्थात् पांचवा गर करण जानना।
इतनी खटपट न करके पहिले जो करण चक्र दे चुके हैं उससे इष्ट तिथि का ठीक करण जान सकते हो।
(९१) दिन या रात का जन्म है कुण्डली देखकर जानना
कुण्डली में जहाँ सूर्य हो वहाँ से जन्म लगन ६ घर के भीतर हो तो दिन का जन्म कहना और सातवें स्थान में हो तो संध्या का जन्म, ७ से १२ स्थान तक लगन हो तो रात्रि का जन्म कहना। लगन में सूर्य हो तो प्रातःकाल का जन्म, दशम में सूर्य हो तो दोपहर का जन्म और चतुर्थ में सूर्य हो तो अद्वैरात्रि का जन्म कहना जैसा यहाँ सूर्य के समय चक्र में बताया गया है। लगन कुण्डली देखा तो सूर्य दशम स्थान