सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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सूर्य का समय चक्र
में है यहाँ से लग्न चौथे घर में है अर्थात् ६ घर के भीतर ही है, इस कारण दिन
का जन्म कहना । सूर्य दशम स्थान में है जिससे प्रगट होता है कि मध्याह्ञं काल का
जन्म है ।
(१२) कुण्डली से जन्म समय जानना
ऊपर जो सूर्य का समय चक्र दिया है उसमें केन्द्र में सूर्य रहने से जो समय होता
है वतला दिया गया है। अब उनके बीच के स्थान से भी समय जानना बतलाते हैं ।
दिन रात की ६० घड़ी में सूर्य, कुण्डली में १२ राशि ( लग्न के अनुसार ) घूम
लेता है । १ राशि में ५ घड़ी या २ घण्टा पडा ।
कुण्डली में सूर्य से लग्न जितने घर दूर हो उसका ५ गुना करो तो इष्ट काल की
घडी निकल आयगी ।
अपनी कुण्डली में सूयं दशम भाव में है वहाँ से लग्न ३ घर अन्तर पर है । ३०८५
-१५ घड़ी अपना इष्ट हुआ । अर्थात् कुण्डली से प्रगट हुआ कि जातक का जन्म
लगभग १५ घडी इष्ट पर हुआ होगा ।
यहां ध्यान रहे कि १ राशि में ३०° होते हँ। ३०० में ५ घडी का अन्तर पडता
है तो ६? में १ घड़ी या १? में १० पल का अन्तर पड़ता है । सूर्य से लग्न जितने
राशि अश के आगे है देख कर इष्ट घडी का विचार कर लो । जसे सूर्य ११ रा ४५? ( मीन के ५० ) पर और लग्न २ रा २२° ( मिथुन के २२ अश) पर है तो सूर्य
को आगे २५ अश और चलना पड़ेगा तव मीन राशि का अन्त होगा । इस कारण
(२ रा २२अ ) रूग्त११ ( ० रा २५ अश )-३ रा १७ अ श= यह सूर्य और
लग्न का अन्तर हुआ। ३ राशि 5 (३३४५ ) 5१५ घड़ी और १७ अंश = ( १७३८ १० ) = १७० पल = २ घ. ५० प. । सब मिल कर १७ घड़ी ५० पल के
लगभग इष्ट हुआ । यह जन्म का इष्ट हुआ । परन्तु यह भी स्थूल मान है इसका
ध्यान रहे ।