सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंग्रहों का बल विचार : २२३
कुण्डली पर से जन्म समय आदि का ज्ञान कैसे किया जाता है यह बता चुके। इस पर से जान सकते हो कि यह कुण्डली चक्र कितने महत्त्व का है और इस कुण्डली चक्र से कितनी महत्वपूर्ण बातें जानी जा सकती हैं। जिसके पास कुण्डली है और वह शुद्ध बनाई गई है तो उससे जन्म समय के सम्बन्ध की बहुत सी उपयोगी बातों का ज्ञान हो सकता है। इस कारण जितनी शुद्धता पूर्वक कुण्डली तैयार की जायगी उतना शुद्ध फल निकलेगा।
यहाँ केवल प्रारम्भिक ज्ञान करने के निमित्त ही कुंडली सम्बन्धी सम्पूर्ण बातें स्थूल रूप से बता दी गई हैं। इससे स्थूल रूप से कुण्डली बनाना आ जायगा और फल विचारने का अनुभव बढ़ेगा।
सूक्ष्म रूप से गणित द्वारा कुंडली आदि तैयार करना और तत्सम्बन्धी पूरा गणित खण्ड में उदाहरण देकर समझाया गया है, जिससे इतना ज्ञान होने के उपरान्त आगे की सब बातें सरलता पूर्वक समझ में आने लगेगी।
अध्याय ४०
ग्रहों का बल विचार
कुण्डली में सब ग्रहों में कौन बलवान है कौन बलहीन है यह जानने की आवश्यकता पड़ती है। इस कारण ग्रहों के बल का विचार करना संक्षेप में बतलाते हैं।
ग्रहों का बल ६ प्रकार से विचारते हैं और उन सबको मिलाकर प्रत्येक ग्रह के बल का विचार करते हैं। क्योंकि बलवान ग्रह पूर्ण फल देता है। बलहीन ग्रह फल देने में असमर्थ होता है। ग्रहों का बल ६ प्रकार का है।
( १ ) स्थान बल, ( २ ) दिग्बल, ( ३ ) कालबल, ( ४ ) चेष्टा बल, ( ५ ) नैसर्गिक बल, ( ६ ) दृग् बल।
( १ ) स्थान बल—५ प्रकार के बल के योग से यह बल बना है।
( १ ) उच्च बल, ( २ ) सप्तवर्गी बल, ( ३ ) युग्मायुग्म बल, ( ४ ) द्वेष्काण बल, ( ५ ) केन्द्रादि बल।
( १ ) उच्च बल—जो ग्रह अपने उच्च में होता है वह पूर्ण बली होता है। जो अपने नीच में होता है वह शून्य बली होता है। इसके बीच में ग्रह हो तो अनुपात से बल निकालना पड़ता है।
( २ ) सप्तवर्गी बल—ग्रहों के गृह, होरा, द्वेष्काण आदि सप्तवर्गीबल साधन करना गणित खण्ड में बताया है। जो ग्रह अपने मिश्र के घर में अपने मूल त्रिकोण