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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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२२४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

या स्वगृह में होता है वह बली होता है। शत्रु के स्थान में होता है उसका वल घट जाता है।

( ३ ) युग्मायुग्म वल—सम राशि स्त्री संज्ञक होती है। चन्द्र व शुक्र ग्रह स्त्री ग्रह है। स्त्री राशि में स्त्री ग्रह हो तो बलवान होता है। विषम राशि पुरुष ग्रह है, उपयुक्त ग्रहों को छोड़कर शेष ग्रह पुरुष हैं। इनमें नपुंसक ग्रह भी पुरुष में शामिल हैं। पुरुष राशि में पुरुष ग्रह बलवान होते हैं। राशि स्त्री है या पुरुष राशि गुणधर्म चक्र में दिया है। ग्रह का लिंग, ग्रह गुण धर्म चक्र में दिया है।

( ४ ) द्वेष्काण वल—एक राशि के ३ भाग करने से प्रत्येक भाग की द्वेष्काण संज्ञा होती है। पहिले द्वेष्काण में पुरुष ग्रह बली होता है। अन्त के द्वेष्काण में स्त्रीग्रह और मध्य के द्वेष्काण में नपुंसक ग्रह बली होता है।

( ५ ) केन्द्रादि वल—केन्द्र में ग्रह पूर्ण बली होता है। पणफर में मध्यम अर्थात् आधावल, आपोविलम में चौथाई वल होता है। केन्द्रादि भाव संज्ञा पहिले समझा चुके हैं।

इन सबके वल का योग करने से ग्रह के स्थान सम्बन्ध से वल का पता लगता है, इस कारण इसे स्थान वल कहते हैं।

दिग्वल—यह अकेला ही है। इसमें दिशा के अनुसार ग्रहों का वल निकालते हैं। जैसे लन्म ( पूर्व ) में बुध और गुरु बली होते हैं। सप्तमभाव ( पश्चिम ) में, शनि बली होता है। चतुर्थभाव ( उत्तर ) में शुक्र और चन्द्र बली, दशम भाव ( दक्षिण ) में सूर्य बलवान होता है। इनसे सातवें घर में ये ग्रह हीन वल होते हैं। जैसे सूर्य दशम भाव अर्थात् सिर पर जब होता है तब बलवान होता है, पाताल ( चतुर्थ भाव ) में बलहीन होता है वीच का वल अनुपात से निकाला जाता है। भाव की दिशायें पहले समझ चुके हैं।

३ काल वल—४ प्रकार का वल मिलाकर काल वल बनता है।

( १ ) नतोनन्त वल, ( २ ) पक्ष वल, ( ३ ) दिन रात्रि त्रिभाग वल ( ४ ) वर्षादि वल।

( १ ) नतोनन्त वल—चन्द्र मंगल शनि रात्रि में बली, अर्द्ध रात्रि में पूर्ण बली, सूर्य शुक्र गुरु दिन में बली, मध्याह्न में पूर्ण बली, और बुध सदा बली रहता है।

जो मध्याह्न में पूर्ण बली होते हैं वे अर्द्धरात्रि में बलहीन हो जाते हैं, और जो अर्द्ध रात्रि में बली होते हैं वे मध्याह्न में बलहीन हो जाते हैं, इसमें भी वीच के समय का वल अनुपात से ( गणित द्वारा ) निकाला जाता है।

( २ ) पक्षवल—पापग्रह—सूर्य, मंगल, शनि, कृष्णपक्ष में बली।

शुभग्रह—चन्द्र, गुरु, शुक्र, बुध, शुक्ल पक्ष में बली।

( ३ ) दिन रात्रि त्रिभाग वल—दिन के और रात के पृथक्कर, भाग ३, करना।

दिन के प्रथम भाग में बुध, द्वितीय में सूर्य-तृतीय में शनि बली।

रात्रि के “ चन्द्र “ शुक्र, “ मंगल “