सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 243, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहों का बल विचार । २२५
गुरु ( दिन और रात्रि में ) सदा बली होता है ।
इससे देखा जाता है कि दिन या रात्रि में जन्म हुआ है और दिन या रात्रि के कौन से भाग में जन्म हुआ है । जिस भाग में जन्म हुआ है उस भाग का सूचक ग्रह बली होगा । शेष ग्रह बलहीन होंगे ।
( ४ ) वर्षादि बल—जिस होरा में किसी का जन्म हो उस होरा स्वामी का बल डू मिलेगा और जिस मास में जन्म हो उस मास स्वामी का बल डू ( आधा ) और वर्ष के स्वामी का बल डू मिलता है । इनको छोड़कर और दूसरे ग्रहों को बल नहीं मिलता ।
( ४ ) चैष्ठा बल—उत्तरायण ( १०, ११, १२, १, २, ३ राशि के सूर्य में ) चन्द्र और सूर्य चैष्ठा बल पाता है और भीमादि ग्रह चन्द्र समागम होने से या बक होने से चैष्ठा बली होते हैं । और यदि ग्रह युद्ध हुआ तो जो ग्रह जीतता है वह चैष्ठा बली होता है ।
( ५ ) नैसर्गिक बल—रवि, चन्द्र, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और शनि ये ग्रह शनि से उल्टे क्रम से एक दूसरे के बली होते हैं अर्थात् शनि सबसे कम बल पाता है, उससे बली मंगल, मंगल से बुध बली, बुध से गुरु बली, गुरु से शुक्र बली, शुक्र से चन्द्र बली और चन्द्र से सूर्य बली होता है । सूर्य सबसे बली होता है और ऊपर बताये क्रम से ग्रह एक दूसरे से बल में हीन होते हैं ।
( ६ ) दूग् बल—जिस प्रकार ग्रहों की दृष्टि ग्रह या भाव पर पड़ती हो उसका दृष्टि चक्र बनाना पहले बता चुके हैं, उसी प्रकार अपनी कुण्डली देखकर ग्रहों की दृष्टि का चक्र बनाया जाता है, जिससे प्रगट होता है कि किस ग्रह पर किस किस ग्रह की दृष्टि है । फिर उसमें विचारते हैं कि उस ग्रह पर कितने पाप ग्रहों की और कितने शुभ ग्रहों की दृष्टि है । सर्व शुभ ग्रह की दृष्टि का योग कर उसका चतुर्थांश निकालते हैं और शुभ योग चतुर्थांश से पाप योग चतुर्थांश घटाने से जान पड़ता है पाप दृष्टि अधिक है या शुभ दृष्टि अधिक है शुभ दृष्टि अधिक हो तो अच्छा और पाप दृष्टि अधिक हो तो बुरा समझा जाता है ।
ऊपर जो ग्रह का बल विचार करना बताया गया है वह बल गणित से निकाला जाता है फिर प्रत्येक ग्रहों के बल को जोड़ कर देखा जाता है कि कौन ग्रह कितना बलवान है । ग्रह जितना बली होगा उतना ही फल देगा । बलहीन ग्रह फल नहीं देता उल्टे हानि करता है । इस कारण बल का विचार किया जाता है ।
बल-निकालने का पूरा गणित उदाहरण सहित गणित खण्ड में दिया है । यहाँ प्रारम्भिक ज्ञान के निमित्त ही बल का वर्णन किया गया है ।
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