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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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२२८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

उस सन् का पंचाङ्क देखो। कर्मवीर पंचाङ्क जबलपुर का सम्बत् १९९५ का मिला, उसे देखा। आश्विन शुक्ल ९ रविवार सम्बत् १९९५ शाका १८६०, तारीख के अनुसार मिला।

आश्विन शुक्ल पक्ष तिथि ९ रविवार ६० व. ० प., नक्षत्र पू०षा० २७-४५, शोभन योग ३-४६, उपरान्त अतिगंड योग, बालव कारण २९-१, विनमान २९-३२, मिथमान ४५-५२ का मिथकालीन सूर्य ५ रा, १५ अंश २९'-३६" दिया है। चन्द्र मकर का ४४-२१ उपरान्त होगा।

उपर्युक्त तिथि आदि जबलपुर की है। वहाँ से नरसिंह पुर का देशान्तर ४ मिनट पश्चिम=१० पल है। पश्चिम होने से उपर्युक्त मान से घटाना पड़ेगा। इसमें फल छोड़ देते हैं, क्योंकि चर संस्कार आदि का ज्ञान अभी नहीं कराया गया है। इस कारण अभी कुछ कठिनाई मालूम पड़ेगी। यह विषय गणित खण्ड में विस्तार पूर्वक उदाहरण देकर समझाया गया है। अभी काम चलाने को स्थूल रूप से ही टिप्पणी तैयार करते हैं।

इष्ट साधन

| घं० | मि० | घड़ी | पल ---|---|---|---|--- जन्म | १० | ० (दिन को) | ३ घं०=७ | २० सूर्योदय | ६ | ६ (पंचाङ्क के अनुसार) | ५४ मि०=२ | १५ शेष= | ३-५४ | =९० घ ४५ प. इष्ट। | योग= ९-४५ | इष्ट हुआ

रविवार को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र १७-४५ है। पंचाङ्क में देखो यह नक्षत्र इसके पहिले शनिवार को कितना था। शनिवार को मूल नक्षत्र २१ घ० ३३ प० दिया है।

| घ० | पल | | घ० | प० ---|---|---|---|---|--- पूर्ण घटी | ६०-० | | शनिवार को पू. वा. | ३८-२७ | भुक्त मूलनक्षत्र | २१-३३ (शनिवार को) | + | रविवार को पू. वा. | २७-४५ | शेष | =३८-२७ | शनिवार को | | योग ६६-१२ |

यह पूर्वाषाढ़ा वचा

भभोग पूर्वाषाढ़ा का

शनिवार को पूर्वाषाढ़ा | ३८-२७ | या | पूर्ण पूर्वाषाढ़ा=६६-१२ | ---|---|---|---|--- + रविवार को इष्ट काल | ९-४५ | ∴ | १ चरण=६६-१२ = घ० | पल ∴ भुक्त पूर्वाषाढ़ा | ४८-१२=भयात | | ४ | १६ ३३

शनिवार को मूल नक्षत्र २१-३३ भुक्त होने के बाद पूर्वाषाढ़ा लगा। शनिवार को पूर्वाषाढ़ा ३८-२७ रहा और रविवार को २७-४५ तक था। सब मिलकर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का भोगकाल ६६-१२ हो गया। इसे भभोग या सर्वशं कहते हैं। भभोग का चौथाई भाग करने पर १ चरण का भोग निकलता है। भभोग ६६-१२ में ४ का भाग देने से १ चरण का भोग १६-३३ आया। अब देखना है कि अन्य समय