सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२३६ : सच्चिद्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
स्थिर राशि कुण्डली
क्रम १०
ग्रह कुण्डली
क्रम ११
ग्रह कुण्डली
क्रम १२
मीन | मेव | वृष | मि. | १२ श. | १ | २ के. | ३ | श. | | के | ---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|--- कुम्भ | राशि कुंडली | कर्क | ११ गु. | जन्म कुण्डली | ४ | सू. | जन्म कुण्डली | मकर | सिंह. | १० | ५ मं. | | मं. धन | वृश्चि | तुला | कन्या | ९ चं. | ८ रा. लग्न | ७ शु. | ६ सू. बु. | चं. | रा. लग्न | शु. | सू. बु.
इसमें जहाँ लग्न लिखा है उसके आगे भाव गिना जाता है। जैसे लग्न में वृश्चिक का राहु है, धन भाव में धन राशि का चन्द्र है इत्यादि प्रकार से कुण्डली क्रम ११ में भाव समझना। परन्तु जो कुण्डली (११) में समझाने के लिए राशि के अंक दिये हैं वे नहीं रहते। केवल कुण्डली क्रम (१२) के अनुसार लग्न-कुण्डली में ग्रह बता दिये जाते हैं।
पाश्चात्य पद्धति से कुण्डली इस प्रकार बनती है कि कुण्डली में दशम भाव ऊपर रहता है, चतुर्थ भाव नीचे रहता है, बाईं ओर लग्न का स्थान (पूर्व) और दाहिनी ओर अस्त (पश्चिम) स्थान रहता है। इसमें भाव स्थिर और राशियों चलायमान बतलाते हैं।
पाश्चात्य पद्धति से कुण्डली क्रम (१३)
कुण्डली क्रम (१४)
भाव स्थिर है इस कारण भाव में जिन-जिन राशियों के जितने २ अंश होते हैं भाव स्थान में लिख दिये जाते हैं और जो ग्रह जितने अंश पर होता है उसके नीचे लिख दिया जाता है। बीच में जन्म समय स्थान आदि लिखा रहता है। देखो कुंडली क्रम १३।