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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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संक्षिप्त जन्मपत्री बनाना : २३७

इसी कुण्डली को कुण्डली क्रम ( १ ) सरीखा भी बताते हैं, जिसमें कि लगन के स्थान में दशम स्थान ऊपर रखते हैं जैसा कि कुण्डली क्रम १४ में बताया गया है। देखो कुण्डली क्रम (१४)।

जन्म पत्रिका

यहाँ विद्यार्थियों को केवल टिप्पणी (संक्षिप्त जन्मकुण्डली) बनाना बताया गया है। पूरी जन्मपत्रिका बनाने में बहुत गणित करना पड़ता है।

जन्मपत्रिका बनाने के लिये जन्म के स्टेन्डर्ड टाइम (चड़ी के समय) को स्थानिक समय बनाकर, काल समीकरण के अनुसार उसका संस्कार कर शुद्ध इष्ट काल बनाया जाता है। जिस पर से जन्म पत्रिका का सम्पूर्ण गणित होता है, इस पर से प्रत्येक ग्रहों की गति के अनुसार चालन बनाकर ग्रह स्पष्ट किया जाता है। फिर अपने स्थान का अक्षांश निकाल कर उससे पलभा बनाकर चरखण्ड निकाल, लंकोदय में उसका संस्कार कर स्वोदय बनाया जाता है। अयनांश निकाल कर सूर्य स्पष्ट से सायन सूर्य बनाकर लंकोदय पर से दशम भाव निकाल कर, फिर सब भाव संघियां निकाल कर सम्पूर्ण भाव स्पष्ट किया जाता है। फिर भाव का रूपात्मक भाव वल विश्वावल चय क्षय फल निकाला जाता है। फिर भावकुण्डली बनाई जाती है और तात्कालिक एवं नैसर्गिक मैत्री पर से पंचधा मैत्री चक्र बनाया जाता है। होरा त्रेष्काण आदि कई प्रकार की वर्ग-कुण्डलियाँ बनाई जाती हैं। दशवर्ग चक्र बना कर उत्तर पारिजातक आदि संज्ञावर्गक चक्र बनाया जाता है। ग्रह पर ग्रहदृष्टि चक्र; भाव पर ग्रहदृष्टि चक्र, शुभ अशुभ दृष्टि चक्र बनाया जाता है। ग्रह का और भाव का पृथक २ वल निकाल कर षडवल चक्र बनाया जाता है। इष्ट कष्ट, इष्ट वल, कष्ट वल, इष्ट दृष्टि, कष्ट दृष्टि, शुभ अशुभ चक्र, शुभ अशुभ पंक्ति आदि के कई चक्र बनाये जाते हैं। अष्टक वर्ग शुभ रेखा चक्र बना कर राशि पिंड ग्रह पिंड बना कर, अष्टक वर्ग आयु साधन, व उसकी दशा अन्तर्दशा साधन का साधन किया जाता है और अंशायु, पिंडायु, जीवशयोक्त आयु, मिश्रायु, आदि आवश्यक आयु, निकाल कर उसकी दशा अन्तर्दशा आदि भी निकाली जाती है और विंशोत्तरी, अष्टोत्तरी, योगिनी आदि दशा निकाल कर उनकी अन्तर्दशा विदशा आदि निकाल कर उनका समय निकाला जाता है। इस प्रकार जन्मपत्रिका में अनेक चक्र बनाये जाते हैं।

इन सब विषयों को पृथक रूप से गणित खण्ड में प्रत्येक का उदाहरण देकर पूरी गणित किया देकर पूर्ण रूप से समझाया गया है। जिसमें गणित करने की सम्पूर्ण रीतियाँ भी दी हैं और लगनसारिणी, दशमसारिणी, दिनमानसारिणी आदि भिन्न सारिणियाँ भी बनाकर उनके बनाने की रीति समझाई गई है, जिसके द्वारा बिना किसी सहायता के विद्यार्थी स्वयं जन्मपत्रिका बना सकेगा।