भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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२३६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

जब पंचाङ्क न हो तो अर्द्धांग निकाल कर मध्यम ग्रह बनाकर ग्रह स्पष्ट करने की सारिणियाँ और रीति भी उदाहरण सहित दे दी गई हैं, जिससे पत्रिका बनाने का कोई विषय शेष नहीं रह् जाता। पूरी जन्मपत्रिका बनाकर फिर उसका फल निकाला जाता है।

अध्याय ४३

फलित सम्बन्धी स्थूल विचार

ज्योतिष सम्बन्धी नियमों को समझाने के पश्चात् पंचाङ्क का ज्ञान, कुण्डली का निर्माण इत्यादि विषय समझाया जा चुका है। कुण्डली निर्माण के उपरान्त प्रत्येक विद्यार्थी को यह उत्सुकता हृदय में होती है कि अब इसका फल जाने। गणित विषय जितना कठिन व सूक्ष्म है उतना ही कठिन व सूक्ष्म फलित विषय है।

फलित विषय को उत्तमता तथा पूर्ण रूप से जानने के लिए ज्योतिष सम्बन्धी सम्पूर्ण गणित, ग्रहों का समावेश, स्थिति तथा देशकाल आदि सब ही बातों का जानना आवश्यक है। किन्तु जिस प्रकार इस ज्ञान खण्ड में स्थूल मान से ज्योतिष के प्रारम्भिक ज्ञान का प्रदर्शन किया गया है उसी प्रकार से स्थूल मान से फलादेश जानने के कुछ नियमों का उल्लेख आवश्यक समझ कर आगे बताया जायगा। साथ ही साथ गोचर ग्रह, अर्द्धा शनि, साढ़े साती शनि, आगुद्वय का स्थूल रूप से विचार, मारकेश विचार, विक्षोत्तरी दशा साधन आदि भी संक्षेप में बताया जायगा, जिससे विद्यार्थी इस ओर रुचि बढ़ा कर उसका अभ्यास कर अनुमान प्राप्त करें।

इन सब का उदाहरण देकर समझाने से पुस्तक का आकार बहुत बढ़ जाता, इस कारण यह सब संक्षिप्त में ही दिया है, क्योंकि इन सब विषयों का पृथक वर्णन फलित खंड में विस्तारपूर्वक होगा।

बहुत लोग शंका करते हैं कि सूर्य की गरमी का प्रभाव एक ही स्थान पर एक ही समय एक सा ही पड़ना चाहिए, परन्तु फलादेश में भिन्न रूप से कैसे कहा जाता है।

इसके समझाने को मध्याह्न के समय भिन्न २ प्रकार की धातुओं के बर्तन में बराबर २ पानी भर कर किसी निश्चित स्थान में निश्चित समय तक रखी। उपरांत देखने से प्रगट होगा कि किसी बर्तन के पानी में गरमी (टेंपरेचर) अधिक होगी, किसी में कम। मान लो तांबा, लोहा कांसा और पीतल ऐसे ४ प्रकार के भिन्न २ धातुओं के बर्तन में पानी रखा था। देखने से ज्ञात हुआ कि तांबे के बर्तन का पानी अधिक उष्ण होगा, फिर लोहे का, पीतल का और सबसे अल्प उष्णता का प्रभाव