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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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फलित सम्बन्धी स्थूल विचार : २३९

कासे के बर्तन पर पड़ा । यह भिन्न भिन्न प्रकार की धातुओं के कारण हुआ । जिसमें दाहक शक्ति अधिक होगी उसमें गरमी का प्रभाव शीघ्र पड़ेगा और जिसमें अल्प होगी उसमें अल्प प्रभाव पड़ेगा ।

ठीक उसी प्रकार संसार के समस्त जड़ और चैतन्य पदार्थ मनुष्य आदि सब ही पर सब ग्रहों का प्रभाव भिन्न २ रूप से पड़ता रहता है । जिस वस्तु पर प्रभाव पड़ रहा है उसकी स्थिति पात्र के समान समझनी चाहिए ।

इस प्रकार जो जिस लघु और गृह स्थिति में और जिस स्थान में उत्पन्न हुआ है उसीके अनुसार उसकी प्रकृति बन जाती है और उसी प्रकृति के अनुसार भिन्न २ मनुष्यों पर भिन्न २ प्रभाव ग्रहों का पड़ता रहता है ।

फलादेश कहते समय आगे बताई हुई बातों का विचार करना चाहिए और अपनी कल्पना शक्ति का उपयोग कर भिन्न २ फलों को तोल कर और विचार कर फल कहना चाहिए । और उसका अन्वेषण करते-करते अनुभव बढ़ाना चाहिए, क्योंकि अनुभव से ही ज्ञान बढ़ता है ।

फलित का स्थूल ज्ञान होने की सामग्री आगे दी है ।

फलित का विचार इन रीतियों से किया जाता है :—

१ गोचर से—केवल जन्म राशि पर से पंचाङ्ग में दिये हुए ग्रहों की स्थिति पर से प्रत्येक मास या पक्ष आदि का फल जाना जाता है ।

१ जन्म कुण्डली से—जन्म कुण्डली देख कर ग्रहों की स्थिति के अनुसार, ग्रह फल, भाव फल, दृष्टि फल, योग फल आदि का पूर्ण विचार कर फल कहा जाता है ।

३ वर्णफल—जन्म कुंडली पर से प्रत्येक वर्ष की, वर्ष कुण्डली बनाकर और उस के भीतर प्रत्येक मास की या यदि आवश्यकता हुई तो प्रत्येक दिन की भी कुण्डली बनाकर वर्ष, मास या प्रतिदिन का फल जाना जा सकता है ।

४ प्रश्नकुण्डली—किसी भी समय जब कोई प्रश्नकर्ता किसी विषय पर प्रश्न करता है और उसका उत्तर चाहता है तो उस समय जो लघु होगी, उस पर से प्रश्न कुण्डली बनाकर उस कुण्डली पर से उस विषय का पूरा निर्णय किया जाता है ।

फल का समय—किसी विशेष फल का समय जानने को भिन्न प्रकार की दशाओं का साधन किया जाता है और उस ग्रह की दशा अन्तर्दशा या विदशा किस समय तक रहेगी गणित से निकाला जाता है । जिससे ठीक तिथि फल की जानी जा सकती है ।

किसी ग्रह की दशा का जो समय है उसके विभाग करने से अन्तर्दशा का समय निकलता है और अन्तर्दशा के समय का विभाग करने से विदशा का समय निकलता है । इस प्रकार फल का सूक्ष्म समय निकाला जा सकता है ।

फज कहने के लिये इन बातों का जानना आवश्यक है

( १ ) शुद्ध इष्ट काल परसे बनाई हुई कुण्डली ।

( २ ) यह देखना कि कुण्डली में कौन ग्रह किस किस स्थान में हैं ।