सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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( ३ ) भाव में जो राशि है उसका स्वामी कौन ग्रह है। अर्थात् ग्रहों का स्वस्थान सबसे पहिले जानना चाहिए।
( ४ ) ग्रहों के उच्च नीच स्थान, मूल त्रिकोण स्थानों का विचार कर देखना कि कोई ग्रह इन अधिकारों में है क्या ?
( ५ ) ग्रहों की नैसर्गिक तात्कालिक और पंचधा मैत्री का विचार कर ग्रहों का परस्पर मैत्री सम्बन्ध देखना।
( ६ ) ग्रह की दृष्टि प्रत्येक ग्रह और भाव पर विचार कर उसका दृष्टि द्वारा सम्बन्ध का विचार करना।
( ७ ) ग्रह गुण धर्म, राशि गुण धर्म और नक्षत्र गुणधर्म पर विचार करना।
( ८ ) ग्रहों के अस्त वक्त्री मार्गी पर विचार।
( ९ ) भिन्न-भिन्न भाव के पृथक नाम और सामूहिक रूप से उनका नाम जो हो, उनमें ग्रहों का विचार।
( १० ) प्रत्येक भाव से क्या क्या विचार किया जा सकता है, इसको जान कर विचारणीय विषय का भाव खोजना।
( ११ ) विचारणीय भाव का स्वामी कौन ग्रह है और किस स्थान में है ? जहाँ भाव स्वामी है उसके भाव से मैत्री सम्बन्ध का विचार करना।
( १२ ) विचारणीय भावपर भावेश या और किन ग्रहों की दृष्टि है। इन बातों के विचारने का प्रारम्भिक ज्ञान करा दिया गया है, परन्तु इसके अतिरिक्त फल विचारने के लिए और अनेक बातों को जानने की आवश्यकता है जिनको जानने पर फल कह सकते हैं।
( १ ) ग्रहों की भिन्न-भिन्न प्रकार की अवस्थाएँ और उनका फल।
( २ ) ग्रहों के भिन्न-भिन्न राशियों में रहने का फल।
( ३ ) भाव में भिन्न-भिन्न राशियों के रहने का फल।
( ४ ) प्रत्येक भाव के अनुसार प्रत्येक ग्रह का फल।
( ५ ) भाव स्वामी के भिन्न-भिन्न स्थानों में रहने का फल।
( ६ ) ग्रहों की मैत्री के अनुसार फल।
( ७ ) ग्रहों की ग्रहों पर दृष्टि के अनुसार फल।
( ८ ) प्रत्येक भाव पर पृथक पृथक ग्रहों की दृष्टि का फल।
( ९ ) भाव में एक से अधिक ग्रह रहने का पृथक पृथक फल।
( १० ) कारक ग्रह, भास्कर ग्रह, अरिष्ट योग, अरिष्ट भंग योग आदि का ज्ञान।
( ११ ) ग्रहों के विशेष योग—जैसे अल्पायु योग, दीर्घायु योग, मृत्यु योग, राज योग, राजसंग योग, राज बंद योग, धन योग, दारिद्र्य योग, अन्ध्या काना लंगड़ा आदि होने के विशेष योग और नामभ आदि अनेक योगों का विचार कर देखना कि कुण्डली में कौन कौन योग पड़े हैं और उनका क्या फल होता है।