सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 259, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ेंफलित सम्बन्धी स्थूल विचार : २४१
( १२ ) ग्रह की विशेष परिस्थिति के अनुसार फल का विचार ।
( १३ ) जन्म समय का सम्बत, अयन, ऋतु, मास, पक्ष, दिन आदि अनेक बातों के विचार से भिन्न-भिन्न फल ।
( १४ ) चन्द्र की राशि, नक्षत्र, चरण आदि के विचार के विशेष फल जानना ।
( १५ ) लून और लगनेश के विचार से विशेष फल जानना ।
( १६ ) आयुर्दाय का ज्ञान ।
इत्यादि अनेक बातों का विचार कर ग्रह और भाव के बलावल और परिस्थिति विचार कर देश, काल, आयु, प्रथा आदि पर विचार करते हुए फल कहना पड़ता है । फिर उनकी दशा निकाल कर वह फल होने का समय निश्चित किया जाता है ।
फल कहने के लिए विचार—
जिस सम्बन्ध का फल विचार करना है उसके लिये देखो वह फल किस भाव से सम्बन्ध रखता है । जैसे सन्तान का विचार करना है तो पंचम भाव से उसका विचार होगा क्योंकि पंचम भाव का नाम सुत भाव है । संतान विचारने के लिए मुख्य भाव तो पंचम है । परन्तु और भी भाव हैं जिनसे संतान का विचार होता है । इस प्रकार देखना कि उस भाव का विचार और कौन कौन भाव से सम्बन्ध रखता है ।
जिस भाव के सम्बन्ध से विचार करना है उस भाव के सम्बन्ध से इन बातों का विचार करना पड़ता है—
( १ ) भाव का कितना बल है ?
( २ ) भाव में कोई ग्रह है या नहीं ।
( ३ ) भाव में शुभ या अशुभ ग्रह है ।
( ४ ) भाव में लगनेश है क्या ?
( ५ ) भाव में कोई ग्रह हो तो उस भाव का बलावल उच्च-नीच आदि अधिकार का विचार ।
( ६ ) भावस्थ ग्रह, त्रिकोण, केन्द्र, त्रिक, आदि स्थानों के स्वामी होने का विचार ।
( ७ ) भाव में कौन २ ग्रहों की दृष्टि है और द्रष्टा ग्रह कैसा है ।
( ८ ) भाव में अनेक ग्रहों का योग पर विचार ।
( ९ ) भाव भावेश युक्त या दृष्ट है ?
( १० ) भावस्थ ग्रह और भावेश के योग दृष्टि में भी अदि सम्बन्ध का विचार ।
( ११ ) भाग, भावस्थ ग्रह और भावेश के सम्बन्ध से विशेष परिस्थिति और विशेष योगों पर विचार ।
( १२ ) भावेशों का परिवर्तन योग ( भावेश का परस्पर एक दूसरे के स्थान में होना ) ।
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