सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 260, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ें२४२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
( १३ ) भाव के कारण ग्रह की स्थिति और योग दृष्टि मैत्री आदि से भाव से सम्बन्ध होने का विचार ।
( १४ ) आयुर्दाय का विचार कर भास्केष का विचार ।
इन सब के विचार करने के प्रथम भावस्थ ग्रह या भावेष की पूरी स्थिति इस प्रकार विचार कर लेनी चाहिए ।
( १ ) भावेष पाप या शुभ या मिथ ग्रह है ।
( २ ) भावेष वक्की मार्गी अस्त आदि विचार से क्या है ?
( ३ ) भावेष के बलावल का विचार ।
( ४ ) भावेष का उच्च, मूल त्रिकोण स्वगृही आदि अच्छे अधिकार पर विचार ।
( ५ ) भावेष का नीच शत्रु-गृही अस्त आदि बुरे अधिकार पर विचार ।
( ६ ) भावेष की भिन्न-भिन्न अवस्थाओं पर विचार ।
( ७ ) भावेष किसी ग्रह के साथ है या अकेला है ।
( ८ ) भावेष का शुभ ग्रह युक्त या दृष्ट होने से अच्छी स्थिति पर विचार ।
( ९ ) भावेष का अशुभ ग्रह युक्त या दृष्ट होने से बुरी स्थिति पर विचार ।
( १० ) भावेष का मित्र ग्रह युक्त या दृष्ट होने से बल प्राप्त करने पर विचार ।
( ११ ) भावेष का शत्रु ग्रह युक्त या दृष्ट होने से निर्बलता आने पर विचार ।
( १२ ) भावेष केन्द्र कोण आदि शुभ स्थानों में होने से अच्छी स्थिति पर विचार ।
( १३ ) भावेष त्रिक ( ६-८-१२ ) स्थानों में होने या इनके स्वामी होने आदि की बुरी स्थिति पर विचार ।
( १४ ) भावेष का केन्द्र त्रिकोण स्वामियों के साथ रहने से अच्छी स्थिति पर विचार ।
( १५ ) भावेष का त्रिकेश के साथ रहने से बुरी स्थिति पर विचार ।
( १६ ) भावेष के वर्ग के अनुसार शुभ या अशुभ वर्ग में होने का विचार ।
( १७ ) भावेष का नवांश में उच्च-नीच आदि स्थिति में होने पर विचार ।
( १८ ) भावेष शुभ या अशुभ स्थान है ।
इत्यादि बातों का विचार कर ग्रहों की और भाव की पूरी स्थिति और सम्बन्ध आदि का विचार कर फल कहना पड़ता है ।