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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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फलित विचार करने के लिए संक्षेप में कुछ साधारण नियम : २४५

( २६ ) भाव में पाप ग्रह हों या उन पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो उस भाव की वृद्धि होती है । जैसे पंचम भाव में शुक्र शुभ ग्रह हो या उसकी दृष्टि हो तो अच्छा है ।

( २७ ) भाव में पाप ग्रह हो या उस पर पाप दृष्टि हो तो बुरा फल देता है । जैसे चतुर्थ में शनि हो उसकी दृष्टि हो तो बुरा है ।

( २८ ) यदि भाव में शुभ और अशुभ ग्रह दोनों हों तो मिश्रित फल होगा । या भाव पर शुभ और अशुभ दोनों की दृष्टि हो तो मिश्रित फल होगा ।

( २९ ) जिस भाव में नीच या शत्रुक्षेत्री ग्रह हों उस भाव की हानि करते हैं । यदि स्वक्षेत्री; मूलत्रिकोण, उच्च के या मित्रक्षेत्री ग्रह हों तो वह भाव शुभ फल देता है ।

( ३० ) भाव, शुभ ग्रह या भावेश युक्त या दृष्ट हो और पापयुक्त या दृष्ट न हो तो शुभ फल होता है ।

यदि पाप युक्त या दृष्ट होने से शुभ फल देने वाले भी बुरे हो जाते हैं । और शुभ युक्त या दृष्ट होने से अशुभ फल देने वाले भी अच्छे हो जाते हैं ।

( ३१ ) भाव में, भाव स्वामी के अतिरिक्त यदि शुभ ग्रह अस्त, नीच या शत्रु स्थानी हो तो अच्छा फल नहीं देता ।

यदि पाप ग्रह अस्त नीच या शत्रुस्थानी हो तो भाव फल को पूर्ण नाश कर देता है ।

( ३२ ) भाव में शुभ स्थान का स्वामी हो या उसकी दृष्टि हो और वह भाव दुष्ट ग्रह या दुष्ट भावेश के साथ न हो या इनकी दृष्टि न हो तो अच्छा फल देता है ।

( ३३ ) बुरे या भले भाव किसी ग्रह से युक्त या दृष्ट न हों तो मध्यम फल देते हैं ।

( ३४ ) जिस भाव में लग्नेश हो उस भाव की उत्पत्ति होती है ।

( ३५ ) भावेश-मित्र गृही, स्वगृही, मूलत्रिकोण या उच्च का हो तो अच्छा फल देता है ।

यदि अष्टम में या अस्त या शत्रु या नीच राशि में हो और शुभ ग्रह युक्त या दृष्ट न हो तो भाव फल नाश हो जाता है ।

( ३६ ) भावेश, पाप ग्रह भी हो परन्तु नीच, अस्त या शत्रुगृही न हो तो ऐसे भावेश से युक्त या दृष्ट भाव बुरा नहीं होता ।

( ३७ ) भावेश अपनी राशि में उच्च का हो परन्तु नवांश में नीच का हो तो अच्छा फल नहीं देता ।

इसी प्रकार अपनी नीच राशि में होकर अपने नवांश में उच्च राशि का हो जावे तो अच्छा फल देता है ।