सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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जैसे मीन का शुक्ल राशि में उच्च का है और अपने नवांश में कन्या राशि का अर्थात् नीच का हो जावे तो अच्छा फल नहीं देगा। यदि राशि में कन्या ( नीच ) राशि का शुक्ल हो परन्तु नवांश में मीन ( उच्च ) का हो जावे तो अच्छा फल देगा : (नवांश निकालना अन्त में बताया है)।
(३८) भावेष अस्तंतगत या नीच का हो तो केन्द्र या त्रिकोण में रहने पर भी शुभ फल विशेष रूप से नहीं देता, अङ्गचन और कष्ट के उपरान्त फल देता है।
( ३९ ) किसी भाव का फल, पहिले भावेष से विचारना, क्योंकि भावेष, उस भाव का स्वामी है और भावस्थित ग्रह उस भाव रूपी घर का किरायेदार ठहरा। भाव में बैठे शुभ ग्रह उस भाव को बाहरी चमक-दमक अवश्य देता है, परन्तु भावेष के बारे होने पर भाव से उत्पन्न फल की प्राप्ति में अङ्गचन होती है। इस कारण भावस्थ ग्रह से भावेष प्रबल है।
( ४० ) भावेष, लग्न से केन्द्र या त्रिकोण या लाभ में हो तो वह भाव फल की वृद्धि करता है।
( ४१ ) ३, ६, ८ या ११ भाव के स्वामी जिस भाव में हों, बारे होते हैं। ५ और ९ भाव के स्वामी अच्छे होते हैं।
केन्द्र स्थानों के स्वामी यदि शुभ ग्रह हों तो बारे फल देते हैं।
केन्द्र स्थानों के स्वामी यदि पाप ग्रह हो तो अच्छे फल देते हैं।
( ४२ ) लगनेश जिस भावेष के साथ हो उस भाव के फल की वृद्धि करता है, परन्तु लगनेश यदि अष्टमेश के साथ हो तो उस भाव की हानि करता है। लगनेश जिस भाव में हो या जिस भाव स्वामी के साथ हो उस भाव का वह फल देगा, परन्तु भाव स्वामी बली हो तब अच्छा फल देगा. यदि बलहीन हो तो दुःख देगा।
( ४३ ) लगनेश यदि अष्टशे मे भी हो जाय तो शुभ समझा जाता है।
( ४४ ) लगनेश ६, ८, १२ भाव के स्वामियों के साथ हो तो बुरा है। लगनेश जहाँ है उस भाव का स्वामी ६, ८, १२ भाव में हो तो बुरा है।
( ४५ ) लगनेश अष्टम में हो परन्तु शुभ दृष्टि हो तो बुरा फल नहीं देता।
( ४६ ) लगनेश जिस ग्रह से युक्त या दृष्ट है उस ग्रह का स्वस्थान क्या है मालूम करो, लगनेश के प्रभाव से उसी स्थान के फल में वृद्धि होगी, जैसे नवम स्थान में लगनेश बुध कुम्भ राशि का है वह चन्द्र से युक्त है, चन्द्र का स्वस्थान कर्क है, जो धन भाव में है तो बुध लगनेश के प्रभाव से नस स्थान की वृद्धि होगी।
( ४७ ) जिस भाव या भावेष या ग्रह के एक ओर पाप ग्रह हो और दूसरी ओर शुभ ग्रह हो तो मिश्रित फल देगा। यदि दोनों ओर शुभ ग्रह हैं तो शुभ फल देगा। यदि दोनों ओर पाप ग्रह हैं तो पाप ग्रहों से धिरा रहने के कारण बुरा फल देगा। जैसे तीसरा भाव लो, इसके एक ओर दूसरे भाव में मंगल हो और चौथे भाव में शनि हो तो यह भाव दोनों ओर पाप ग्रहों से धिरा जाने के कारण बुरा