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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२५२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

जन्म राशि और जन्म लग्न में क्या अन्तर है ध्यान में रखना चाहिए। जन्म समय जो राशि पूर्व में उदय हो रही है वह जन्म लग्न है और जन्म समय चन्द्रमा जिस राशि में रहता है वह राशि जन्मराशि कहलाती है। यहाँ गोचर फल जन्मराशि से विचार किया जाता है।

अध्याय ४६

शनि का विशेष विचार

साडेसाती शनि

शनि का प्रभाव इतर ग्रहों को अपेक्षा विशेष देखने में आता है, क्योंकि शनि अधिकतर दुःख प्रगट करता है। यह एक राशि में लगभग २।। वर्ष रहता है। शनि का पूरा फेरा २९ वर्ष ५ मास १५.६ दिन में होता है। शनि बुरे स्थान में होने से कोई बुरा प्रभाव उत्पन्न करता है तो सबसे अधिक समय तक शनि के प्रभाव से ही दुःख भोगना पड़ेगा। इस प्रकार शनि लगातार ऐसी ३ राशियों में रहता है जिनका प्रभाव जातक पर बुरा पड़ता है तो लगातार ७।। वर्षों तक शनि का बुरा प्रभाव जातक को भोगना पड़ता है। उस समय शनि की साडेसाती आई है ऐसा कहते हैं।

जन्म समय चन्द्रमा जिस राशि पर हो वह जन्मराशि कहलाती है। जब शनि अपनी जन्म राशि के समीप की राशि पर आता है तो वह पीड़ा देना आरम्भ करता है। यह राशि जन्मराशि से बारहवीं होती है। वहाँ २।। वर्ष शनि रहता है। फिर आगे चल कर शनि जब जन्मराशि में आता है तो यहाँ भी २।। वर्ष रहता है। उपरान्त जन्म राशि से दूसरी राशि पर भी शनि २।। वर्ष रहता है।