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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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अनुदाँय : २५५

दीर्घायु मध्यमायु अल्पायु आयु ( ८० से १२० वर्ष तक ) ( ४० से ८० वर्ष तक ) ( ३० से ४० वर्ष तक ) लन्मेश चर स्थिर द्विस्वभाव चर स्थिर द्विस्वभाव चर स्थिर द्विस्वभाव अष्टमेश चर द्विस्व० स्थिर स्थिर चर द्विस्व० द्विस्व० स्थिर चर

स्पष्टीकरण

( १ ) दीर्घायु—लन्मेश अष्टमेश दोनों चर राशि में हों या एक स्थिर दूसरा द्विस्वभाव राशि में हों ।

( २ ) मध्यमायु—लन्मेश अष्टमेश में से एक चर दूसरा स्थिर में या दोनों द्विस्वभाव में हों ।

( ३ ) अल्पायु—लन्मेश अष्टमेश में से एक चर दूसरा द्विस्वभाव में हो या दोनों स्थिर राशि में हों ।

१ इस प्रकार राशि जिसमें लन्मेश ( लग्न स्वामी ) और अष्टमेश ( अष्टम स्थान का स्वामी ) हों, विचारना कि वह राशि चर स्थिर या द्विस्वभाव है । उस पर से ऊपर बताये चक्र के अनुसार आयु का विचार करना यह पहली रीति हुई ।

२ इसी प्रकार दूसरी रीति यह है कि लग्न या सप्तम भाव में चन्द्र हो तो लग्न और चन्द्र से विचार करना । यदि वहाँ चन्द्र न हो तो शनि और चन्द्र से ऊपर बताये अनुसार आयु का विचार करना ।

३ तीसरा प्रकार यह है कि लन्मेश और अष्टमेश की तरह लग्न और होरा लग्न से भी ऊपर बताये अनुसार विचार करना अर्थात् चर आदि उस राशि की संज्ञा का विचार कर आयु का विचार करना ।

इस प्रकार तीनों बताई हुई रीति से या २ प्रकार की रीति से जो आयु प्राप्त हो नीचे चक्र के अनुसार आयु का विचार करना ।

आयुदीर्घायुमध्यमायुअल्पायु
आयु वर्ष१२०१०८१३
कितने प्रकार से
आई हुई आयु

जैसे दीर्घायु ३ प्रकार से आने पर १२० वर्ष, २ प्रकार से १०८ वर्ष केवल एक प्रकार से ९६ वर्ष । इसी प्रकार ऊपर चक्र के अनुसार आयु का विचार करना ।

इसके आगे और भी गणित द्वारा आयु स्पष्ट की जाती है । यहाँ केवल प्रारंभिक ज्ञान के लिये दिया है । पूरी आयु निकालना व लग्न और होरा लग्न गणित द्वारा निकालना गणित खण्ड में दिया है : सूक्ष्म रूप से आयुदाँय गणित करने से ही निकलता है । आरंभ में विद्यार्थी को सबसे ऊपर बताये हुए स्थूल प्रकार से आयु निकाल कर संतोष भर लेना चाहिए । जैसे

( १ ) यह महात्मा गांधी जी की कुंडली है ।