सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंनक्षत्रों की पहिचान : २३
कहते हैं। इनसे भी ध्रुव तारे की पहिचान हो सकती है। चित्र संख्या १४ देखने से ये तारागण और ध्रुव पहिचाने जा सकते हैं।
सप्तश्रृणि
यह ७ तारों का झुण्ड है जो सदा उत्तर में ध्रुव की परिक्रमा करते रहते हैं। ये ७ तारे ७ श्रृणि माने गये हैं। इनमें से ४ तारे खाट के पाये सदृश हैं जिनसे कुछ लम्बाई लिए एक चौकोन बनता है। इनके नीचे की ओर से एक तिरछी, छोर में कुछ उठी हुई पूछ सरीखी गई है जिसमें ३ तारे हैं। इस चौखेटे के सबसे आगे के दो पाये एक ऊपर एक नीचे हैं जिनको क्रतु और अत्रि कहते हैं। इन दोनों की सीध में यदि एक लकौर आगे उसी सीध की ओर बढ़ती हुई खींची जाये तो उसी सीध में एक तारा साधारण प्रकाश का दिखेगा। उसी तारे की ओर प्रतिदिन ध्यान दें तो वह कभी चलता नहीं दिखेगा और उसी तारे के आस पास सप्तश्रृणि घूमते दिखेंगे। दो चार बार ध्यान पूर्वक उत्तर की ओर देखने से यह ध्रुव तारा पहिचान में आ जायेगा।
कश्यप मण्डल में बाईं ओर ऊपर जो तारा है उससे एक लम्बी रेखा लम्ब स्वरूप खींची जावे तो वह भी ध्रुव में आकर मिलेगी। चित्र संख्या १४ के देखने से यह समझ में आ जायेगा। सप्तश्रृणि और महर्षि के बीचों बीच यह ध्रुव तारा है। इस ध्रुव के आस पास सप्तश्रृणि आदि पूर्व से पश्चिम को घूमते दिखते हैं।
अध्याय ७
नक्षत्रों की पहिचान
क्रान्ति प्रदेश में २७ तारागणों का समुदाय या नक्षत्र हैं और अश्विजत् नक्षत्र क्रान्ति मण्डल के बाहर है। इन सबको पहिचान लेना चाहिए। इन सब नक्षत्रों को पहिचान लेने से ज्योतिष की कई बातें शीघ्र समझ में आने लगेंगी। इस कारण इन सबकी पहिचान यहाँ देते हैं। आगे इनके नक्शे भी दिए हैं, जिनके सहारे आकाश में नक्षत्रों को पहिचानने का प्रयत्न करते रहना चाहिए। देखें चित्र संख्या ३९,४०,४१ (आकाश के तीन चित्र परट)। इनके अतिरिक्त पृथक्-पृथक् नक्षत्रों को पहिचानने के लिए अलग चित्र दिये हैं। उनकी पहिचान यहाँ बताई जाती है।
१ अश्विनी—के ३ तारे हैं परन्तु उनकी पहिचान के लिए एक ओर आगे का तारा मिला देने से शीघ्र पहिचाने जा सकते हैं। २ तारे बीच में पास-पास कुछ तिरछे एक से दूसरा कुछ नीचा परन्तु बराबरी से हैं और ऊपर छोर पर १ तारा और नीचे १ तारा है। ये दोनों तारे चमकदार हैं परन्तु उत्तर का तारा अधिक