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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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२६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

है। जो देखने में एक ही तारा सदृश दिखता है। अप्रेल के महीने में म्यालू के समय यह सिर पर आता है। पूष के महीने में पूर्णिमा के लगभग चन्द्रमा इस नक्षत्र पर रहता है।

चित्र संख्या २१ ७ पुनर्वसु

चित्र संख्या २२ ८ पुष्य

चित्र संख्या २३ ९ आश्लेषा

६ आश्लेषा या अश्लेषा—इसके ५ तारे और चक्र सरीखा आकार बताया है। यह पुष्य के दक्षिण में है और उसी की बराबरी से सिर पर आता है। चन्द्र पुष्य से आश्लेषा पर शीघ्र आ जाता है। इसके बारीक तारे हैं जिनमें एक प्रकाशवान् तारा है। देखें चित्र संख्या २३।

१० मघा—इसके ६ तारे माने जाते हैं और आकार भवन सदृश बताया गया है। परन्तु इन ६ तारों पर विचार करने से हंसिया सरीखा आकार दिखाई देता है। ध्यान में आते ही यह शीघ्र पहिचाना जा सकता है। इसके ४ बड़े तारे हैं। इनका आकार एक समानान्तर भुज चौकोन सा बनता है, जिस प्रकार दियासलाई की डिव्वी के ऊपर के ढक्कन को दवा देने से कुछ तिरछा चौकोन बनता है। इसके पश्चिम की ओर दक्षिण कोण का तारा तेजस्वी है और पहली श्रेणी का है। इसके दक्षिण में एक बारीक तारा है जो पाँचवाँ तारा है। पूर्व बाजू से दोनों दक्षिण के तारे अधिक तेजस्वी हैं। मई महीने के आरम्भ में म्यालू के समय यह सिर पर कुछ दक्षिण की ओर हटा हुआ दिखता है। माघ की पूर्णिमा को चन्द्रमा इसके समीप रहता है। कोई इसके ५ तारे मानते हैं। देखें चित्र संख्या २४।

११ पूर्वा फाल्गुनी } मघा के पूर्व में कुछ उत्तर को दोनों फाल्गुनी के ४ १२ उत्तरा फाल्गुनी } गरे हैं जो चौकोन सरीखे दिखते हैं। उसके पूर्व-पश्चिम बाजू का उत्तर-दक्षिण बाजू से अन्तर दुगने से कुछ कम है। पश्चिम की ओर के २ तारे पूर्वा फाल्गुनी हैं। इसके उत्तर की ओर का अधिक तेजस्वी है। पूर्व बाजू के दोनों तारों को उत्तरा फाल्गुनी कहते हैं। इसके नीचे दक्षिण का तारा अधिक तेजस्वी है। उत्तर का बारीक है। फाल्गुन में इस नक्षत्र पर पूर्णिमा को चन्द्र आता है फाल्गुन में ये दो नक्षत्र म्यालू के समय पूर्व में दिखते हैं। कोई जून में म्यालू के समय सिर पर दिखते हैं। और ठीक सिर पर आते हैं। देखें चित्र संख्या २५।