सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें५२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
इस प्रकार प्रत्येक ग्रह की पृथक्-पृथक् गति होती है। कोई शीघ्र चलता है कोई धीरे-धीरे चलता है। इस प्रकार क्रांति प्रवेश में कोई ग्रह कभी आगे रहते हैं, कभी पीछे रहते हैं, कभी-कभी चलते-चलते मिल जाते हैं।
प्रत्येक ग्रहों की गति
(१) चन्द्र—सबसे शीघ्र चलने वाला ग्रह है। पृथ्वी के आस-पास प्रायः ३० दिन में घूम कर अपनी परिक्रमा पूरी करता है।
(२) शनि—सबसे धीमी चलने वाला ग्रह है। यह ३० वर्ष में अपनी परिक्रमा पूरी करता है।
(३) सूर्य—१ वर्ष (३६५.२५ दिन) में परिक्रमा पूरी कर लेता है। प्रतिदिन लगभग १° चलता है। इस प्रकार स्थूल मान से १ राशि में १ मास रहता है।
इस प्रकार १ राशि में चन्द्र २। दिन, मंगल १।। मास, बुध १ मास, गुरु १३ मास, शुक्र १ मास, शनि ३० मास, राहु १८ मास, केतु १८ मास, हर्षाल १ राशि में ७ वर्ष और नेपच्यून १३ वर्ष रहता है।
इस प्रकार कम ज्यादा समय परिक्रमा में लगने का कारण यह है कि जो ग्रह पास हैं उनकी परिक्रमा में अल्प समय लगता है और जो ग्रह दूर हैं उनकी परिक्रमा में दूरी के अनुसार अधिक समय लगता है। चित्र संख्या १ से परिक्रमा की दूरी समझ पड़ेंगी। ग्रहों की प्रतिदिन की मध्यम गति (औसत गति) भी इस प्रकार है :-
| दैनिक मध्यम गति | दैनिक मध्यम गति |
|---|---|
| ग्रह | अंश |
| सूर्य | ० |
| चन्द्र | १३ |
| बुध | १ |
| शुक्र | १ |
राहु केतु को छोड़ कर शेष ग्रहों की गति सदा बदलती रहती है। राहु केतु की गति कभी नहीं बदलती, सदा इनकी एक सरीखी गति रहती है। राहु केतु सदा बड़ी रहते हैं अर्थात् सदा एक सरीखी चाल से उल्टे चलते रहते हैं।
सूर्य और चन्द्र कभी बड़ी नहीं होते शेष ग्रह बुध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि, हर्षाल और नेपच्यून सदा बड़ी और मार्गी होते रहते हैं और उनकी दैनिक गतियों में भी परिवर्तन होता रहता है।
उपरोक्त ग्रह अपनी इच्छानुसार बड़ी मार्गी नहीं होते परन्तु एक प्रबल शक्ति सूर्य के कारण ही गतियों में यह सब परिवर्तन होता है, क्योंकि सब ग्रह सूर्य की आकर्षण शक्ति के प्रभाव से खिंचे हुए हैं।
सूर्य के आस-पास जो परिक्रमा का मार्ग है वह एक सरीखा गोल नहीं बण्डाकार है, जिसके बीच में सूर्य है। देखें चित्र संख्या ७। चित्र से प्रकट होगा कि इस मार्ग