सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 71, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहों की गति : ५३
का कुछ भाग सूर्य के समीप पड़ जाता है कुछ दूर हो जाता है। कोई ग्रह जब चलते-चलते सूर्य के अधिक पास पहुँच आता है तो उसे सूर्य के समीप Perihelion कहते हैं ( यह घटना पृथ्वी के सम्बन्ध में लगभग १ जनवरी को होती है )। जब सूर्य से ग्रह अधिक दूरी पर चला जाता है तब उसे सूर्य से अधिक दूर Aphelion कहते हैं। पृथ्वी १ जुलाई के लगभग अधिक दूरी में होती है।
ग्रह जब सूर्य के समीप हो जाता है तो सूर्य की आकर्षण शक्ति बढ़ती है जिसके कारण सूर्य के खिंचाव से ग्रह की गति में अधिक तेजी आ जाती है और ज्यों-ज्यों वह ग्रह सूर्य से दूर होता जाता है उसकी गति धीमी होती जायेगी क्योंकि सूर्य से दूरी होने के कारण सूर्य का खिंचाव (आकर्षण शक्ति) कम होने लगता है और उस समय ग्रह बड़ी हो जाता है अर्थात् फिर लौट पड़ता है। परन्तु जब दूर से लौट कर ग्रह सूर्य की ओर बढ़ता है तो फिर ग्रह में भी सूर्य के प्रभाव से बल आ जाता है और समूहल कर फिर आगे बढ़ता है तब मार्गी ग्रह हो जाता है। अब समझ गये होंगे कि इसी अण्डाकार वृत्त के कारण उन पर सूर्य की आकर्षण शक्ति का घटाव-बढ़ाव होता है जिससे ग्रह बड़ी-मार्गी होते हैं।
कुचस्तम्भ Stationary
जब ग्रह बक होने से उसकी गति मन्द हो जाती है तब उस ग्रह का स्तम्भ होना कहते हैं। उस समय ग्रह एक राशि पर बहुत दिनों तक रहता है, इसे ही कुचस्तम्भ कहते हैं। परन्तु मंगल ग्रह के सम्बन्ध में ही कुचस्तम्भ शब्द का प्रयोग होता है। शेष ग्रहों की ऐसी स्थिति में स्तम्भ ही कहेंगे।
साधारण प्रकार से कौन ग्रह कितने दिनों में बड़ी मार्गी होता है, यह नीचे चक्र में बताया है।
उदय अस्त बड़ी मार्गी चक्र
| ग्रह | अस्त होने के | उदय के उपरान्त | बड़ी के उपरान्त | मार्गी के उपरान्त |
|---|---|---|---|---|
| इतने मास उपरान्त | इतने मास में | इतने मास में | इतने मास में | |
| उदय होगा | बड़ी होगा | मार्गी होगा | अस्त होगा | |
| मंगल | ४ मास | १० मास | २ मास | १० मास |
| गुरु | १ मास | ४३ मास | ४ मास | ४३ मास |
| शनि | १३ मास | ३ मास | ४ मास | ३३ मास |
| ग्रह पूर्व में अस्त | पश्चिम में | बड़ी के | पश्चिम में | पूर्व में उदय |
| होने के उपरान्त | उदय उपरान्त | इतने दिनों | अस्त के बाद | के बाद के इतने |
| पश्चिम में | इतने दिनों | बाद पश्चिम | इतने | इतने दिनों |
| इतने दिनों में | में | में | दिनों में | में पूर्व में |
| में उदय होगा | बड़ी होगा | अस्त होगा | उदय होगा | मार्गी होगा अस्त होगा |
| शुक्र ३२ दिन | ३२ दिन | ४ दिन | १६ दिन | ४ दिन ३२ दिन |
| शुक्र ७५ दिन | २४० दिन | २३ दिन | ९ दिन | २३ दिन २४० दिन |