सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
वर्ष मान—वर्ष ४ प्रकार के हैं
दि० घ० पल = सूर्य १२ राशियों में १ बार घूम ( १ ) सौर वर्ष = ३६५ १५ ३० लेने से होता है। इस प्रकार १२ सौर मास का १ वर्ष होता है।
दि० घ० पल = शुक्ल प्रतिपदा से अमावस तक १२ ( २ ) चांद्र वर्ष = ३५४ ३० ० मास का या मलमास होने से १३ मास का एक वर्ष होता है।
( ३ ) सावन वर्ष = ३६० सावन दिन का=१२ सावन मास का दि० घ० पल=१२ नाक्षत्र मास का १ वर्ष
( ४ ) नाक्षत्र वर्ष= ३२४ ० ०
सम्बत्सर
पंचांग में सम्बत्सर का नाम दिया रहता है। संकल्प तर्पण आदि में जिसका उपयोग होता है और इससे फल भी बिचारते हैं
सम्बत्सर ६० होते हैं। किसी शाका में २४ जोड़कर ६० का भाग देने से जो शेष बचे उसी क्रमानुसार सम्बत्सर का नाम होता है। जैसे शाका १८५६+२४÷६०= १६० शेष २०=२० व्यय नाम का सम्बत्सर हुआ या सम्बत्+९÷६०= शेष सम्बत्सर। जैसे सम्बत् १९९९+९=२०००=शेष २० व्यय सम्बत्सर।
इसके अनुसार सम्बत्सर होता है, परन्तु कभी २ एक सम्बत् में २ सम्बत् आ जाते हैं। सम्बत् १९९३ में २२ वाँ सर्वधारी सम्बत्सर के उपरान्त २३ वाँ विरोधी सम्बत्सर भी उसी वर्ष लग गया था, जिससे १ अधिक हो जाता है। वास्तव में गुरु की गति के अनुसार गणित से सम्बत्सर निकाले जाते हैं। यहाँ तो सम्बत्सर निकालने की मोटी रीति दी है।
सम्बत्सर के नाम
| १ प्रभव | १६ चित्रभानु | ३१ हेमलम्बी | ४६ परिधावी |
|---|---|---|---|
| २ विभव | १७ सुभानु | ३२ विलंबी | ४७ प्रमादी |
| ३ शुक्ल | १८ तारण | ३३ विकारी | ४८ आनन्द |
| ४ प्रमोद | १९ पाथिब | ३४ श्रावरी | ४९ राक्षस |
| ५ प्रजापति | २० व्यय | ३५ प्लव | ५० नल |
| ६ अंगिरा | २१ सर्वजित् | ३६ शुभकृत् | ५१ पिंगल |
| ७ श्रीमुख | २२ सर्वधारी | ३७ शोभन | ५२ कालयुक्त |
| ८ भाव | २३ विरोधी | ३८ क्रोधी | ५३ सिद्धार्थ |
| ९ युवा | २४ विकृति | ३९ विश्वावसु | ५४ रौद्र |
| १० घाता | २५ खर | ४० पराभव | ५५ दुर्मति |
| ११ ईश्वर | २६ नन्दन | ४१ प्लवंग | ५६ दुर्दुभि |
| १२ बहुधान्य | २७ विजय | ४२ कीलक | ५७ संधिरोदगारी |
| १३ प्रमाथी | २८ जय | ४३ होम्य | ५८ रक्ताक्षी |
| १४ विक्रम | २९ मन्मथ | ४४ साधारण | ५९ क्रोधन |
| १५ वृष | ३० दुर्मुख | ४५ विरोधकृत् | ६० क्षय |