सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंव्यव्याय १४ : ६५
सन् ईस्वी के ३१०२ वर्ष पहिले कलियुग आरम्भ हुआ था। सन् ईस्वी आरम्भ होने के ५७ वर्ष पहिले विक्रम सम्बत प्रचलित हुआ था। इस प्रकार (३१०२-५७)= ३०४५ वर्ष हुए। ये वर्ष, सम्बत के आरम्भ होने के समय तक के कलि के गत वर्ष हुए।
हापर तक के वर्ष } इतने वर्ष सृष्टि आरंभ से सम्बत आरंभ सम्बत आरंभ तक कलि वर्ष+ ३०४५ } तक के हुए।
योग १९७२९४७०४५
इसमें इष्ट सम्बत और जोड़ दो तो इष्ट सम्बत तक के वर्ष प्राप्त होंगे।
कलियुग-सन् ईस्वी के ३१०२ B. C. ( बी. सी. ) ( इतने वर्ष पहिले ) आरंभ हुआ था। सम्बत २००० में ५०४४ वर्ष कलि के बीत चुके और ४२६९५९ वर्ष व्यतीत होने को शेष रहे। ता० १८ फरवरी ३१०२ बी.सी. (ईशा के जन्म के पहिले) अर्धरात्रि से कलियुग आरम्भ हुआ था। भाद्रपद मास, कृष्णपक्ष १३ रविवार आश्लेषा नक्षत्र व्यतीपात योग में अर्धरात्रि के समय कलियुग की उत्पत्ति हुई थी।
इस प्रकार यह कलियुग का प्रथम चरण है, ब्रह्मा का दूसरा पहर है, श्वेत वाराह कल्प है और वैवस्वत मन्वन्तर है। जब कलियुग आरम्भ हुआ था सूर्य चन्द्र आदि सब ग्रह एक ही राशि पर थे।
विक्रमादित्य ने ५७ बी. सी. में पहिले विदेशियों को भारत से भगाया था, उस समय से विक्रम सम्बत चला है। ईसा के जन्म के ७८ वर्ष के उपरान्त शालिवाहन राजा ने शाका चलाया है।
[ २ ] वर्ष प्रमाण—
| वर्ष ---|--- शाके + ७८ वर्ष=सन् ईस्वी | सन् ईस्वी—५८३=सन् हिजरी सम्बत—५७ ,, ,, ,, | सन् हिजरी—१००=सन् फसली सन् ईस्वी+५७,,=सम्बत | सन् फसली—१ =बंगला सन् ,, -७८ =शाका | सम्बत—१३५ =शाका |
विक्रम सम्बत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होता है। सन् ईस्वी में सम्बत बनाने में यह ध्यान रहे कि सम्बत मार्च के महिना में बदल जाता है और पूस मास में सन् बदलता है। इस प्रकार एक सम्बत् में २ सन् या १ सन् में २ सम्बत् आ जाते हैं। इस कारण मास का विचार कर सन् या संवत् का निर्णय करना चाहिए। अर्थात् संवत् में ५७ घटाने से जो सन् आता है वह वर्ष आरम्भ का सन् होता है। आगे पूस में सन् बदल कर दूसरा सन् लग जाता है। जैसे सम्बत् २००२-५७=१९४५ सन् ईस्वी, यह सन् सम्बत् के आरम्भ में होगा और सम्बत् २००२ के पूस मास में सन् बदल कर १९४६ सन् हो जायगा।
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