सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 87, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ेंमास और पक्ष विचार : ६९
बंगला मास
सूर्य की नियरम-संक्रांति से आरम्भ होता है और मेपाकं ( मेघ की संक्रांति ) से नया बंगला सन् आरम्भ होता है । मीनाकं से चैत्र मास आरम्भ होता है और मेपाकं में वैशाख मास होता है । जब वर्ष आरम्भ होता है तब संक्रांति जिस दिन होती है उसके दूसरे दिन से बंगला की पहली तारीख ( तिथि ) गिनी जाती है । किसी महीने में २९, ३०, ३१ या कभी ३२ दिन पड़ जाते हैं ।
अंग्रेजी महिनों के नाम
क्रम अंग्रेजी दिन चान्द्रमास क्रम अंग्रेजी दिन चान्द्रमास क्रम अंग्रेजी दिन चान्द्रमास
महीना
महीना
महीना
| १ जनवरी ३१ पूस | ५ मई ३१ वैशाख | ९ सितम्बर ३० भाद्रपद |
|---|---|---|
| २ फरवरी २८ माघ | ६ जून ३० ज्येष्ठ | १० अक्टूबर ३१ आश्विन |
| ३ मार्च ३१ फाल्गुन | ७ जुलाई ३१ आषाढ़ | ११ नवम्बर ३० कार्तिक |
| ४ अप्रैल ३० चैत्र | ८ अगस्त ३१ श्रावण | १२ दिसम्बर ३१ मार्गशीर्ष |
प्लुत वर्ष=Leap year जीप इयर=में फरवरी २९ दिन की होती है । जिस सन् में ४ का भाग पूरा लग जाय या सदी century में ४०० का भाग पूरा लग जावे तो उसे प्लुत वर्ष कहते हैं । शेष वर्षों में फरवरी २८ दिन की होती है ।
मुसलमानी महिनों के नाम अर्थात् हिजरी सन् के महीने
| १ मोहर्रम | ५ जमादि उल अब्बल | ९ रमजान |
|---|---|---|
| २ सफर | ६ जमादिउल आखर ( सानी ) | १० सव्वाल |
| ३ रबिउल अब्बल | ७ रज्जब | ११ जीकाद |
| ४ रबिउल आखर ( सानी ) | ८ सावान ( शववान ) | १२ जिल हिज्ज |
चाँद दिखने से महीना आरम्भ होता है और इनमें लौट का वष या अधिक मास नहीं होता । इस कारण प्रत्येक तीसरे वर्ष इनके महीनों से अन्तर पड़ता रहता है अर्थात् कभी मुहर्रम जाड़े में कभी बरसात में कभी गरमी में पड़ता है । मुहर्रम की १ तारीख से हिजरी सन् आरम्भ होता है और चाँद दिखने के दूसरे दिन महीने की पहली तारीख होती है । कभी २९ दिन कभी ३० दिन का महीना चन्द्र की तिथि की घटा बढ़ी के अनुसार होता है ।
फसली सन् में महीना प्रत्येक कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से आरम्भ होता है और रमजान महीना से नया सन् आरम्भ होता है । इसमें भी चन्द्र स्थिति के अनुसार कभी २९ कभी ३० दिन हो जाते हैं ।
सौर मास और संक्रांति
सूर्य जब १ राशि के अन्त में जाकर दूसरी राशि में संक्रमण करता है ( जाने लगता है ) तब उसे संक्रांति कहते हैं । अर्थात् जब २ राशियों की संधि पर सूर्य आता है तब आगे की राशि की संक्रांति होती है । इस प्रकार प्रत्येक सौर मास में एक संक्रांति होती है । जिस राशि पर सूर्य जाता है उस राशि की संक्रांति कहलाती है ।