भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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९२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

'साधारण त्रिशांश फल

१ मंगळ के त्रि० में जन्म--चपल, कठिन वचन बोलने वाला, क्रूर बुद्धि।

२ शनि के त्रि० में जन्म--घूमने वाला, मलिन बुद्धि ।

३ गुरु के त्रि० में जन्म--धनवान्‌ ।

४ बुध के त्रि० में जन्ग--गुरु, देव, भक्ति में निरत, साधु प्रिय, बंधुमान्‌ ।

५ शुक्र के त्रि० में जन्म--कामी सुंदंर शरीर सुखी । त्रिशांश विशेष फल ।

१ त्रि० कुंडली में भिन्नगही या उच्च के ग्रह हों--तो सब कायं करने में उत्साह रखने वाला, धर्मात्मा, सज्जनों से पूज्य । २ त्रि० कुण्डली में ग्रहों के सत रज तम गुण विचार कर इनमें जो अधिक बली

अकाशवान्‌ हो--उसी ग्रह के अनुसार फल का विचार कर फल कहना ।

पे चन्द्र गुरु-सतगुणी । 3 बुध--रजोगुणी ।

शनि मंगल--तमोगुणी ।

सात्विक ग्रह बली हो दयालु स्थिरता युक्त, सत्यवक्ता, विनीत, देव ब्राह्मण का भक्त ।

रजोगुण ग्रह बली हो--काव्य करने वाला, शूरवीर, कुछ स्त्रियों में पूर्ण तन मन रखने वाला ।

तमोगुणी ग्रह बली हो तो दूसरों को ठगने वाला, मुखं, आलसी, क्रोधी, अति निद्रालु । इन के मेळ से फलों के भी कई भेद हो जाते हैं ।

अध्याय-५.

अष्टक वर्ग

फल कहने की विधि जन्म लग्न, चन्द्र लग्न, नवांश लग्न, द्वारा बताई ही जाती है परन्तु गोचर का अष्टक वर्ग द्वारा सूक्ष्म फळ भी निकाला जाता है । टर्न शरीर है जिससे शरीर का विचार होता है और चन्द्र मन है जिससे मान- सिक ऐहिक पारलौकिक आदि सभी कार्यों कां विचार होता है ये सब जन्म कुंडली से विचार होता है । जन्म चन्द्र की राशि को आदि लेकर गोचर के वर्तमान ग्र हों की स्थिति पर राशि अनुसार फल कुछ स्थूल हो जाता है जिससे उसमें सूक्ष्मता लाने को अष्टक द्वारा फल का विचार होता है जिसमें प्रत्येक ग्रह और लग्न को भी आदि मानकर उनके शुझ स्थानों की गणना कर अष्टक वर्ग चक्र बनाया जाता है जिससे सब द में इसके द्वारा फल का अच्छा या बुरा प्रभाव स्पष्ट रूप से प्राप्त हो जाता है ।

'अष्टक वर्ग से ४ प्रकार से फल का विचार होता है । (१) आयु साधन. करना, (२) भिन्न भिन्त वर्गों मे रेखाओं और बिन्दुओ के द्वारा अनेक प्रकार के शुभाशुभ फल बनाया जाता है । (३) ऊपर वर्ग के रेखा और