भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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षड्वर्गः गिचार : ९१

५-- पंचम द्वा० वाला-२० वर्ष में रक्त विकार से भय ।

६--षष्ठ द्वा० वाला-२२ वर्ष में अग्नि से भय ।

७--सप्तम द्वा० वाला-२८ वर्ष में जलोदर से भय ।

=--अष्टम द्वा० वाला-३० वर्ष में व्याघ्र से भय ।

९--नवम द्वा० वाला-३२ वर्ष में वाण के पारेका से भय ।

१०-दशम द्वा० वाला-३० वर्ष में जल में डूवने या वायु विकार का भय ।

११-एकादश द्वा० वाळा-३१ वर्ष में भार्या तथा कन्या की मृत्यु के कारण तथ

जल से भय ।

१९--दडादश द्वा० वाला-२९ वर्षे में गाड़ी के पहिये से दबने का भय ।

इन सब अल्प मृत्युयों से बचने पर पूर्ण आयु भोगे ।

त्रिशांश फल

१ मंगल स्व त्रिशांश मॅ-स्त्री सहित हो, तेजस्वी, बल, पराक्रम, आभूषण युक्त,

साहस का काम करनेवाला ।

२ शनि स्व त्रिशांश मे--उसकी स्त्री शीघ्र मरे या भाग जावे या विवाह ही न

हो, परस्त्री से आसक्त, दुःखो, घर वस्त्र और परिवार से युक्त हो, मलिन रहे, क्रूर या क्रोधी स्वभाव का हो, रोगी रहें । ३ गुरु स्व त्रि० में-धन, कीति, सौख्य बुद्धि इनसे युक्त, तेजस्वी सब लोगों में

मान्य उद्योगी, भाग्यवान्‌ ।

४ वध स्व त्रिं० में-वृद्धिमान, गीत नाच, वाद्य पुस्तक चित्र इनका ज्ञाता, कपटी,

कविता करे, बोलने में चतुर, साहसी, शास्त्रार्थ को जानने वाला, उत्तम आचार, लोक

में मान्य, वढ़ई आदि कला का काम जानने वाला ।

५ शुक्र स्व त्रि० मे--बहुत संतति, निरोग बहुत सुख, ऐश्वयंवान, धनवान्‌,

रूपवान्‌, स्त्री सुख हो, क्र स्वभाव, कोमल अंग, बहुत स्त्री वादी ।

त्रिं० में सूर्ष और चन्द्र का त्रिं० नहीं होता इससे सूर्य चन्द्र जिसके त्रि० में हो

उनके फल का प्रथम विचार होता है।

१ मंगल के त्रि० में सूयं हो--शूरवीर हो

मंगर के त्रि० में चन्द्र हो--शिथिल हो ( देर से काम करे। )

२ शनि के त्रि० में सूयं हो--विषम या क्रूर स्वभाव ।

शनि के त्रि० में चन्द्र हो--हिंसक ( जीवघाती ) ।

३ गुर के त्रि० में सूय हो--उत्तम गुणवान्‌ ।

गुरु के त्रि में चन्द्र हो--धनवान्‌, शान्त स्वभाव ।

४ बुध के त्रि० में सूर्य हो--सुखी ।

बुध के नि० में चन्द्र हो- पंडित हो ।

५ शुक्र के वि० में सूर्य हो--उत्तम शोभागुक्त शरीर ।

शुक्र के त्रि० सें चन्द्र हो-संवें लोक प्रिय ।