सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 98, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें९० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
१०--दशवां द्वा० कुंभ का है-मेष के ग्यारहवें द्वो० में कुम्भ है उस समान
फल होगा ।
११--यारहवां द्वा० मीन काँ है- भेष के बारहवें द्वा० में मीन है उस समान
फल होगा ।
१२-बारहवां द्वा० मेष का है-मेष के पहिले द्वा० में मेष है उस समान फळ होगा ।
इस प्रकार किसी भी राशि के द्वादशांश का फल जान सकते हैं उस द्वाशांश में जो
राशि है उस राशि का फल मेष के द्वादशांश में जहाँ मिले उसके अनुसार फल जानना।
जैसे कुम्भ लग्न के दूसरे द्वादशांश का फल जानना है । कुम्भ में पहिला द्वादशांश
कुम्भ का होता है । दूसरा मीन का हुआ । मेष लग्न के द्वादशांश के फल वर्णन में
मीन राशि का फल मेष लग्न के अंतिम द्वादशांश में दिया है वही लेना अर्थात् जल में
होने वाले पदार्थों का भोक्ता मोती व शाक भाजी बेचने वाला स्त्री में आसक्त आदि ।
द्वादशांश का संक्षिप्त जन्म फल
मेष द्वा७ में जन्म--खलात्मा, चोर, पाप आचरण ।
वृष द्वा० में जन्म--स्त्री के धन से धनी, रोगवान् ।
मिथुन द्वा० में जन्म--जुआड़ी, सुशील ।
ककं द्वा० में जन्म--दुष्ट आचरण और तपस्वी ।
सिंह द्वा० में जन्म-सुशीळ, रःजकार्यं परायण ।
कन्या द्वा० में जन्म--जुआड़ी, स्त्री में लीन !
तुला द्वा० में जन्म-व्यापारी या धनी ।
वृश्चिक द्वा० में जन्म--धूते, चोरों का स्वामी, मारने की इच्छा वाला ।
घन द्वा० में जन्म--पिता तथा देव ब्राह्मण भक्त ।
मकर द्वा० में जन्म -शस्यादि युक्त और दूत वाळा ।
कुम्भ द्वा० में जन्म--खल ।
मीन द्वा० में जन्म--धनी और पंडित । र
ग्रह मित्र के या उच्च द्वा० में हो--अनेक स्त्रियों का अधिकारी और अनेक ऋद्धि
सिद्धि युक्त । द्वादशांश से आयु और मृत्यु विचार मेष आदि १२ राशियों के द्वादशांश के अनुसार आयु इस प्रकार है ।
राशि १ र ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ पश्चात्
आयु ८० ८४ ८५६ ८७ ८५ ६० ५६ ७० ९० ६६ ५६ १०० मृत्यु ।
पूर्वोक्त आयु के बीच में भी मृत्यु का भय होता है ।
१--प्रथम द्वा० वाला-१८ वर्ष में जल से भय ।
२--ढितीय द्वा० वाला-९ वर्ष में सपं से भय ।
३--तृतीय द्वा० वाला-१० वषं में घोर ज्वर से भय ।
४--चतुर्थ द्वा० वाला-३२ वर्ष में राजयक्ष्मा से भय ।