भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 97, कुल 454 में से

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पृष्ठ 97

षड्वगे वित्रार : ८९

(ऽ) अष्टम द्वा० (वृश्‍चिक) नेत्र व छाती बड़ी, गोल जाँघ, माँ बाप गुरु इनकी शिक्षा में रहे, संतान से दुःखी, राज दरबार में मान व महत्त्व, पिंगट वर्ग, बुरा स्वभाव, गुप्त पापी, मछली या पक्षी द्वारा कहीं भी चिह्न हो । (९) नवम ढ्वादशांश (धन)--मुँह व गर्दैन लम्बी, बाप का बहुत धन हो, दयालु, कवि, अच्छा बोलने वाळा, दाँत, कान व नाक बड़े, कार्य साधन में उद्योगी, कुबड़ा, लम्बे नख, लिखने पड़ने का ज्ञान हो, पुस्तक बाँधने व चित्रकारी का ज्ञान हो, प्रौढ़, धार्मिक प्रिय वोली बोले, वन्धुओं का दष करे । (१०) दशम द्वा० (मकर)--स्त्री पुत्र पर बहुत प्रेम, दांभिक, अन्ध, कृश, कमर के पास दुबल, छोटी कमर नेत्र उत्तम, सबकी सुनने वाला, सबका प्रिय, आळसी, शीत सहन करे, परिभ्रमण करे, बलिष्ठ, काव्य का करने वाला, विद्वान्‌, लोभी, जहाँ न जाना हो वहाँ जावे, निळंज्ज, निर्दय । (११) एकादश द्वा० (कुम्भ)--चूहे सरीखी गर्दन, अङ्गो पर बहुत नसे, कड़े केश, ऊँचा शरीर, पैर, जाँघ, जाँघ के ऊपर का भाग और पीठ का भाग लम्बा हो, मुँह, कमर व बस्ती मोटी, पर स्त्री में आसक्त, परद्रव्य लेने की वुद्धि, पापी, नाशक, मिलनसार, पुष्प चन्दन प्रिय, चलने वाला मित्रों को प्रिय । (१२) द्वादश ह्वा० (मीन)--जल में होते वाले पदार्थों का भोक्ता, मोती व शाक-भाजी वेचने वाळा, स्त्री में आसक्त, शरीर उत्तम, नाक ऊँची, बड़ा मस्तक, शत्रु का पराभव करने वाला, स्त्री के वश, नेत्र कांति उत्तम, धनवान्‌, गड़ाधन प्राप्त हो। मेष लग्न में पहिला द्वा० मेष राशि से आरम्भ होकर क्रमानुसार बारहवाँ मीन का होता है

(२) वृष के द्वादशांश का फल

६--पहिला द्वा० वृष का है--मेष में दुसरा द्वादर्शांश जो वृष राशि का है उसी अनुसार फल होगा अर्थात्‌ सुन्दर विकास कर गमन करे आदि जो फल कहा हैः क्यों कि जो राशि होती है द्वादशांश में पहिले उसी राशि का द्वादशांश होता है । इससे जिस राशि का द्वादशांश हो उसी के अनुसार फल विचारना । २--वृष में दूसरा द्वा० मिथुन का है इससे मेष छूग्न के तीसरे द्वा० में मिथुन है उसके समान फल होगा ।

३--तीसरा द्वा० ककं का है-मेष के चौथे द्वा० में ककं है उस समान फल होगा । ४ चौथा द्वा० सिंह का है-मेष के पांचवे द्वा० में सिंह है उस समान फल होगा । ५--'पांचवा द्वा० कन्या का है-मेष के छठे द्वा० में कन्या है उस समान फल होगा ।

६--छठा द्वा० तुळा का है-मेष के सातवें द्वा० में तुला है उस समान फल होगा। ७--सातवां द्वा० चुश्चिक को है-मेष के आठवें द्वा० में वृश्चिक है उस समान फल होगा ।

८--आठवां द्वा० घन का है-मेष के नवमें द्वा० में धन है उस समान फल होगा । ९--नवां द्वा० मकर का है-मेष के दशम द्वा० में मकर है उस समान फ्रल होगा !

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