भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 107, कुल 454 में से

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पृष्ठ 107

अष्टक वर्ग विचार : ९९

इसमें विशेष कोई अन्तर नहीं है रेखा के स्थान में यहाँ ग्रह का नाम दिया है ।

परन्तु रेखा का चिह्न शुभता सूचक बना देना सरल जेंचता है ।

कई ग्रंथकार वाई ओर दिए गिए ग्रहों का क्रम इस प्रकार रखते हैं (१) सूर्य (२)

शनि (३) गुरु (४) शुक्र (५) मंगल (६) बुध (७) चन्द्र (०) लग्न परन्तु यहाँ

उपयोग किया हुआ क्रम ही उचित समझ पड़ता है ।

अष्टक वर्ग चक्र की शुभ रेखाओं में मत भेद

यहाँ जो अष्टक वर्ग शुभ रेखा चक्र दिया है उसमें कुछ मत भेद भी हैं-

(१) सूर्य अष्टक वर्ग में शुभ होरा में बुध और गुरु का ८दिया है परन्तु वृहज्जा०

जा० भ० आदि अन्य ग्रन्थों में ९ दिया है ८ नहीं दिया । यहाँ जातक पारिजात के

अनुसार ही बुध और गुरु में ९ दिया है । ८ नहीं दिया ।

(२) चन्द्र अ० वर्ग में गुरु में वृहस्पाराशर में २ दिया है १२ नहीं दिया । वृह￾ज्जातक जा० भऽ, जा० पारि० आदि में २ नहीं दिया १२ दिया है। इससे यहाँ भी

२ नहीं दिया १२ दिया है।

(३) मंगल के अ० वर्ग में बुध का जा० भ० में ११ की जगह १२ दिया है।

बृहत्पारा० जा० पारि० आदि कई ग्रन्थों में ११ ही दिया है १२ नहीं है । इससे यहाँ

भी ११ दिया है १२ नहीं दिया ।

(४) बुध अ० वर्ग में चन्द्र का २फे वदले ५ जा० भ० में दिया है अन्य ग्रन्यो में

२ ही दिया है ५ नहीं दिया इससे जा० पारि० आदि के अनुसार २ दिया है ५

नहीं दिया। बुध अ० वर्ग में लग्न में जा० भ० में ८ के बदले ९ और १० के बदले

१२ दिया है परन्तु जा०'पारि० वृ० पारा० आदि में ८ और १० दिया है वही यहाँ भी

दिया है ।

(५) गुरु अ० वर्ग में शंभु होरा० में लग्न में ८ दिया है शेष ग्रन्थों गेंद नहीं दिया

९ दिया है उसी के अनुसार यहाँ भी दिया है ।

(६) शुक्र अ० वर्ग में वृहत्पारा० में मंगल का ४ दिया है वृ० जा०, जातक

यारि० आदि कई ग्रन्थों में ४ नहीं दिया इससे यहाँ ४ छोड़ दिया ।

(७) शनि अ० वर्ग में जा० भ० में २ के बदले ३ सूर्य का दिया है । जा०पारि०,

बु० पारा०, वु० जा० आदि में २ ही दिया है ३ नहीं दिया यही यहाँ दिया है ।

बुध में जा० भ० में ११ नहीं दिया जातक पारिजात आदि में ११ दिया है इससे

यहाँ भी दिया है। लग्न में जा० भ० में ९ अधिक दिया है जातक पारि० आदि में ९

नहीं दिया इससे यहाँ नहीं दिया ।

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